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फर्क

Er Dev Anand

Er Dev Anand

लघु कथा

August 10, 2017

” मम्मी दादी की तबीयत अब कैसी है ? पहले से कुछ सुधार हुआ है या नहीं बहुत मन कर रहा है। उन्हें देखने को कहो तो एक-दो दिन के लिए आ जाऊं -बेटे रमेश का फोन था।
नहीं अभी तुम्हें आने की कोई जरूरत नहीं है। इतनी दूर से आने में काफी पैसा खर्च होगा और पढ़ाई का नुकसान होगा ,वह अलग। वह बात तक नहीं कर पा रहे हैं। अब जब खबर देंगे इकट्ठे ही आना इतना कहकर उन्होंने फोन काट दिया रमेश की मम्मी ने। और मन ही मन बुदबुदाने लगी पता नहीं क्या हो गया है इन बच्चों को , बहुत प्यार आ रहा है उस बुढ़िया पर कुछ देकर भी तो नहीं जा रही है!
तुम भइया से क्या बात उल्टी-सीधी बातें कर रही हो आप भैया को आने के लिए मना कर रही है दादी उन्हें कितना याद कर रही है ? स्वाति ने कहा (रमेश की बहन)
चुप करो ! स्वाति बहुत बोलने लगी हो सिर्फ अपने काम से काम रखो जाओ एक कप चाय बना कर लाओ। सिर बहुत दुख रहा है इतना कहकर रमेश की माँ धम्म से सोफे पर ही थी कि दोबारा फोन की घंटी बजी ।
ट्रिन – ट्रिन
ट्रिन – ट्रिन
अब कौन है ?
स्वाति ”
स्वाति फोन उठाना
स्वाति किचन में थी पर उसने जवाब नहीं दिया (शायद वह गुस्से में थी )
‘ यह लड़की भी ना कोई काम नहीं करना चाहती है – रमेश की मां बोली
इतने में फोन की घंटी बंद हो चुकी थी।
पर फिर थोड़ी देर बाद फिर से वही घंटी बजी
ट्रिन- ट्रिन
ट्रेन अबकी बार थोड़ा गुस्से में रमेश की मां उठकर फोन को उठाया ।
उठाते ही रमेश की मां चिल्ला पड़ी ” एक बार मना कर दिया कि आने की जरुरत नहीं है तो बार बार क्यों एक ही बात पूछ रहे हो ? ”
उधर से आवाज आई ‘ अरे दीदी !
तुम्हें क्या हो गया है ? मैं प्रवीण तुम्हारा भाई बोल रहा हूं । अरे प्रवीण !
इतनी रात में फोन सब ठीक तो है।
दीदी !
बुरी खबर है मां को हार्ट अटैक हुआ है। वह अभी अस्पताल में है, वैसे तुम परेशान मत होना हम उनकी देखभाल कर रहे हैं ।’
परेशान कैसे ना होऊँ ?
अरे वह मेरी मां है। अभी उनकी उम्र ही क्या है ?
देखो उनके इलाज में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए । पैसों की जरूरत हो तो तुरंत बोलो और ,हां आशीष को भी फोन करके बुला लेती हूं।उसके होने से तुम्हें काफी सहारा हो जाएगा। (रमेश की माँ एक सांस में सब बोल गयी)
मम्मी और मामा बातें सुनकर स्वाति है सोचने पर मजबूर हो गई उनकी मां उनके लिए सब कुछ है तो मेरे पापा की मां उनके लिए क्यों कुछ नहीं लगती फिर दोनों में फर्क क्यों ?
बच्चों के मन में ” फर्क ” के बीज कौन बो रहा है ?

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Author
Er Dev Anand
दिमाग से इंजीनियर दिल से रचनाकार ! वस्तुतः मैं कोई रचनाकार नहीं हूँ, मैं एक इंजीनियर हूँ । मैं वही लिखता हूं जो मेरी आंखें देखती हैं और दिल समझता है उन्हें को कलम के सहारे में व्यक्त कर देता... Read more
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