Oct 21, 2017 · कविता
Reading time: 1 minute

फर्क अब इस तरह समझना

शायरी दिल को छू जाती है
कविता दिल मे बस जाती है
फर्क अब इस तरह समझना
जो आने वाला था,दरवाजा खटखटा के चला जाता है
जिसकी उम्मीद नही थी,वो घर मे बस जाता है

पसंद हमेशा शायरी आती है
असर जिंदगी मे कविता कर जाती है
फर्क अब इस तरह समझना
हर मोड़ पर कोई न कोई चेहरा पसंद आता है
असर वही करता है जो कसर छोड जाता है

शायरी लबो से लबो तक जाती है
कविता तो आत्मा से मिल जाती है
फर्क अब इस तरह समझना
जिस्म का खेल एक से दो तो कभी हर बार होता है
जो खिलखीलाहट मे खामोशी समझ ले वही यार होता है

कई ‘शे’र गजल तो कई गजले कविता बन जाती है
फर्क अब इस तरह समझना
वादा हर कोई करता है,जिसने ना किया वही निभा जाता है

हर मोड़ पर कोई न कोई चेहरा पसंद आता है
असर वही करता है जिस पर नजर पड जाती है
फर्क अब इस तरह समझना
शायरी दिल को छू जाती है
कविता दिल मे बस जाती है…..
शक्ति

1 Like · 117 Views
Copy link to share
शक्ति राव मणि
48 Posts · 3.1k Views
Follow 5 Followers
नाम:- शक्ति राव View full profile
You may also like: