.
Skip to content

पढ़ने की ललक हम भी लियें हुये! राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर एक कविता बाल मन को प्रदर्शित करती हुई।

Akib Javed

Akib Javed

कविता

November 12, 2017

मन भोला भाला लिये
हाथ में झोला लिये हुये

मुट्ठी में अपने जँहा लिये
आँखों में सपने सजाये हुये

ख्वाबो को सच करने की चाहत में
पढ़ाई में दिन-रात एक किये हुये

बुजुर्गो के आशीष की कामना हैं रखते
ऐसे ही अपने चमन में फले-फूलते हुये

गरीब हैं हम,थोड़ा सा ध्यान दीजिये
पढ़ने की ललक हम भी लिये हुये

नही हैं पैसे पास में,ना ही खाने को
परिस्थियों,भूख के हैं हम मारे हुये

जाते हैं कमाने हम पढ़ने के उम्र में
माँ-बाबा के हालात को देखते हुये

कुछ करने का जज़्बा भी रखते हैं
मौके मिले तो हम भी आसमाँ छुये!!

®आकिब जावेद

Author
Akib Javed
कुछ लिखना चाहता हूँ,सोचता हूँ,शब्दो से खेलता हूँ,सीखता हूँ,लिखता हूँ।।
Recommended Posts
?गुज़र गया वक्त ?
गया वक्त गुजर गया वो जिसके, इन्तजार में बबाले हुये जा रहे थे। एक पल में शोला और सबनम हुए जा रहे थे।। वो आये... Read more
इक ज़रा सी ज़िंदगी में इम्त्तिहां कितने हुये,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
इक ज़रा सी ज़िंदगी में इम्त्तिहां कितने हुये बोलने वाले न जाने बेज़ुबाँ कितने हुये ध्रुव तारा ज़िंदगी का कौन होता है कहीं इस ज़हन... Read more
( यह हास्य गज़ल हैं , इसमें इक तोतला प्रेमी अपने प्रेमिका से दिल का दर्द बयां कर रहा हैं ! . . . )... Read more
कुछ आर हुये हैं कुछ पार हुये हैं..........................
कुछ आर हुये हैं कुछ पार हुये हैं दुनियां में दुश्मन कुछ यार हुये हैं दौर-ए-आज में चुप ना बैठो हरगिज़ सहने पर ही अत्याचार... Read more