*प्रेरक*

हर ग़म में जो मुस्काते हैं
खुशियों के नगमे गाते हैं
तोड़े मन के सारे बंधन
इक नया सवेरा पाते हैं

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*काव्य-माँ शारदेय का वरदान * Awards: विभिन्न मंचों द्वारा सम्मानित
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