कविता · Reading time: 1 minute

प्रेम

जीवन अधूरा प्रेम बिना
भक्ति अधूरी प्रेम बिना
है समर्पण अधुरा ही प्रेम बिना
है हर भाव अधुरा प्रेम बिना
ज्ञान अधुरा अध्यात्म अधुरा
इस सृष्टि का सृजन अधुरा
सबकुछ है अधुरा प्रेम बिना
प्रेम ही खोना प्रेम है पाना
प्रेम है आना प्रेम है जाना
दु;ख है सुख है ख़ुशी है गम है
धरती से गगन तक सब कुछ बंधा है
इस ढाई अक्षर के पाश में
व्यंग नहीं पूर्ण सत्य है यकी न हो तो
विज्ञानं भी जनता है की —
सागर भी अम्बर को मिलने मचल उठता है
हर पूनम की रात में और इतना की आ जाती है
सुनामी……………..ले आती ………ही …
चन्द्र किरणों के साथ लहरों की
ये प्रेम गाथा कभी कवियों ने गीत लिखे तो
चकोर ने मल्हारे गा दी
कबीर रहीम नानक और मीरा
सभी को इस प्रेम ने बाँधा
राम कृष्ण या शिव की गाथा
प्रेम बिना सुनी सब साधा

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