प्रेम (2)

तुम्हें पाना ही
सब नहीं है ।
जीवन सार्थक
भी नहीं होता
मात्र तुम्हें
पाने भर से ।
बल्कि-बहुत कुछ
त्यागना ,सहना
और खोना पड़ता है,
तुम्हें पाने के बाद
तुम्हारे लिए।
-ईश्वर दयाल गोस्वामी ।
कवि एवं शिक्षक

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