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प्रेम

संदीप शर्मा

संदीप शर्मा "माही"

कविता

March 20, 2017

एक कविता

प्रेम
दर्शन है
कोई
प्रदर्शन नहीं

प्रेम
संस्कृति है
कोई
संस्कार नहीं

प्रेम
शजर की छाँव है
कोई
शाख का पत्ता नहीं

प्रेम
आत्मा है मधुरता की
कोई
साज का तार नहीं

प्रेम
मधुवन है ख्वाबों का
कोई
अमावस की रात नहीं

प्रेम
हकीकत है दुनिया की
कोई
गुजरी कहानी नहीं

प्रेम
गीत है मेरे अश्कों का
कोई
मेरे होठों की मुस्कान नहीं

प्रेम
अहसास है इबादत का
कोई
पल दो पल की इल्तजा नहीं

संदीप शर्मा “कुमार”

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