मुक्तक · Reading time: 1 minute

प्रेम सुधा

आधार छंद:-किरीट सवैया

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प्रेम सुधा रसना जिसके उर में बहती रहती सरिता सम।
नित्य निरंतर निर्मल पावन वो रहता मिटता उर का तम।
बाहर सुंदरता दिखती तब प्रेम सुगंधित है मन भीतर –
कंटक कानन में हँसता रहता रखता न कभी मन में गम ।
-लक्ष्मी सिंह
नई दिल्ली

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