प्रेम पर जसाला

प्रेम पर जसाला
************
1
वो
मिली
तब से
लग गई
प्रेम की झड़ी
हसीन हो गई
ये विरान जिन्दगी
2
वो
मुझे
याद हैं
मुलाकातें
हाथों में हाथ
मीठी मीठी बातेंं
गुजारी दिन रातें
3
मैं
तुम
जब से
हमसाया
हमसफर
बदली जिन्दगी
मिली है कायनात
4
मैं
खुश
बहुत
बनी तुम
हमसफर
संवर गई हैं
बदहाल जिन्दगी
5

गए
नजारे
जब से हैं
साथ तुम्हारे
अखियों के तारे
मेरे राजदुलारे
6
है
प्रेम
महान
जीवन में
मिल जाए तो
जाग उठता है
सोया हुआ इन्सान
7

गई
बहारें
सुरमई
हसीं फिजाएं
बहीं हैं हवाएं
खुशी से मुस्कराएं
8
हैं
याद
बुझा सा
मुरझाया
हसीं चेहरा
हुआ जब जुदा
सदा सदा के लिए
9
है
कुछ
भी नहीं
ये जिन्दगी
प्रेम के बिना
खोया खोया जहां
ना मिलती पनाह
10
तू
मिली
नहीं हो
ढूंढा तुझे
सारा जहान
यहाँ-वहाँ-कहाँ
गया में जहाँ-जहाँ
*****************

सुखविंद्र सिंह मनसीरत
खेड़ी राओ वाली (कैथल)

2 Comments · 7 Views
सुखविंद्र सिंह मनसीरत कार्यरत ःःअंग्रेजी प्रवक्ता, हरियाणा शिक्षा विभाग शैक्षिक योग्यता ःःःःM.A.English,B.Ed व्यवसाय ःःअध्ययन अध्यापन...
You may also like: