.
Skip to content

प्रेम का ‘सैक्सी’करण !

Neeraj Chauhan

Neeraj Chauhan

कविता

December 3, 2016

जिस दिन मुन्नी की बदनामी को हंस कर देश ने स्वीकारा था
जिस दिन शीला की जवानी पर, बुड्ढे तक ने ठुमका मारा था
मारा था शालीनता को , प्रेम की पवित्रता को मार दिया था
यहाँ तक की राधा को भी, ‘सैक्सी’ करार दिया था,

उस दिन मुझे लगा था की ,
अब हो रहा हैं
प्रेम का सैक्सीकरण..

जिस दिन से खत्म हुई
प्रेम की एकनिष्ठता,
एक नही ,
दो नही,
तीन-तीन
चार-चार से
बढ़ी
एक ही की घनिष्ठता

उस दिन मुझे लगा था की ,
अब हो रहा हैं
प्रेम का सैक्सीकरण..

जिस दिन पुरे परिवार ने साथ बैठकर
नग्न चित्र देखे,
जिस दिन पार्क में झाड़ियों के पीछे
चिपके कुछ अल्हड़ मित्र देखे

उस दिन मुझे लगा था की,
अब हो रहा हैं
प्रेम का सैक्सीकरण..

जिस दिन राम जपने के दिनों में
बुड्ढे ठर्कियों ने अपनी ‘इश्कमिजाजी’ को
अपनी ‘एनर्जी’ का नाम दिया,
जिस दिन बाप ने अपने ही पवित्र रिश्ते को
बदनाम किया

उस दिन मुझे लगा था की ,
अब हो रहा हैं
प्रेम का सैक्सीकरण…

– नीरज चौहान

Author
Neeraj Chauhan
कॉर्पोरेट और हिंदी की जगज़ाहिर लड़ाई में एक छुपा हुआ लेखक हूँ। माँ हिंदी के प्रति मेरी गहरी निष्ठा हैं। जिसे आजीवन मैं निभाना चाहता हूँ।
Recommended Posts
आकर राधे देख लो
आकर राधे देख लो तुम कलयुगी संसार नारी का मान करे नही वो कैसे करेगा प्यार तुम्हारे समर्पण पर कान्हा ने खोला ह्रदय द्दार पर... Read more
मुझे मेरी सोच ने मारा
नही जख़्मो से हूँ घायल, मुझे मेरी सोच ने मारा || शिकायत है मुझे दिन से जो की हर रोज आता है अंधेरे मे जो... Read more
माँ तेरे प्रेम की मुझको धारा मिले
माँ तेरे प्रेम की मुझको धारा मिले फिर मेरी जिंदगी को किनारा मिले १ जिंदगी भी मुझे दर्द देती रही माँ तेरी गोद का अब... Read more
प्रेम
मुझे कोई शिकायत नही उसने मुझे अपनी जिंदगी का हिस्सा नही समझा। पर खुशी इस बात कि है उसने मुझे कुछ तो समझा । प्रियमवदा... Read more