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प्रेम का बाग़

MANINDER singh

MANINDER singh

गज़ल/गीतिका

September 2, 2016

तलाश रहे है लोग वजह मुस्कुराने की,
टूटे हुए रिश्तो को फिर से निभाने की,,

अंजाने में हुई अपनों से भूलो को भूल,
चेष्टा मे हर कोई अपनों को मनाने की,,

दिलो में प्रेम ही प्रेम इक दूजे के लिए,
चाहत में हर कोई अपनों को पाने की,

छोटे छोटे से परिवारों में बंधा हर कोई,
हठ सभी की बैठ आँगन में बतियाने की,,

गुजारिश है “मनी” की भुला कर ईष्या को,
कोशिश करो सभी प्रेम का बाग़ सजाने की,

Author
MANINDER singh
मनिंदर सिंह "मनी" पिता का नाम- बूटा सिंह पता- दुगरी, लुधियाना, पंजाब. पेशे से मैं एक दूकानदार हूँ | लेखन मेरी रूचि है | जब भी मुझे वक्त मिलता है मैं लिखता हूँ | मशरूफ हूँ मैं अल्फ़ाज़ों की दुनिया... Read more
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