गीत · Reading time: 1 minute

प्रेम का ढाई आखर

हर हर गंगे नहाईए प्रेम के ढाई आखर में
महिमा सब गाइए , प्रेम के ढाई आखर की

जीवन का रहस्य छिपा है प्रेम के ढाई आखर में
हर अधूरी प्यास बुझी है प्रेम के ढाई आखर से
भर भर डूबकी लगाइए प्रेम के ढाई आखर में

हर हर गंगे

योगी और मुनि जन डूबे प्रेम के ढाई आखर में
विश्वामित्र की समाधि भंग प्रेम के ढाई आखर से
इसलिए दिल रमाईए प्रेम के ढाई आखर में
हर हर गंगे

प्रेम की मधुशाला पीकर, प्रेमी मन हुआ है तृप्त
जिसके हाथ से छूट गई हाला , वो हुआ है संतप्त
इसलिए कहती हूं पी लो प्यारे प्रेम का ढाई आखर
हर हर गंगे
ऐसा कोई न जो इसकी , लौं में गिर कर न जले
मदमस्त होकर पियेगा प्याला जो , हो जाए मस्त
हर हर गंगे

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डॉ मधु त्रिवेदी शान्ति निकेतन कालेज आफ बिजनेस मैनेजमेंट एण्ड कम्प्यूटर साइंस आगरा प्राचार्या, पोस्ट ग्रेडुएट कालेज आगरा *************** My blog madhu parashar.blogspot.in Meri Dunia कोर्डिनेटर * राजर्षि टंडन ओपन…
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