प्रेम एक अनुबंध

प्रेम मदमस्त मधुशाला है,प्रेम एक मधुबाला है
प्रेम बंद कक्ष का ताला है,प्रेम मादकता का हाला है।

प्रेम अत्यंत निर्मल है,प्रेम पुण्य गंगाजल है
प्रेम सुंदरता का काजल है,प्रेम प्रिय प्रेयसी का आंचल है।

प्रेम अति पवित्र है,प्रेम संकट में मित्र है
प्रेम वातावरण में सुगंधित इत्र है,प्रेम कल्पना का चित्र है।

प्रेम भगवान का उपहार है,प्रेम संबंधों का मनुहार है
प्रेम तो निर्विरोध उपकार है,प्रेम स्वयं की सुखद हार है।

प्रेम कपोल कल्पना है,प्रेम अल्पना है
प्रेम उच्च उपासना है,प्रेम प्रतिशोध की त्यक्त कामना है।

प्रेम अनुबंध है,प्रेम यहां मधुर संबंध है
प्रेम विरोध पर प्रतिबंध है,प्रेम जीवनकांड का स्कंध है।

प्रेम परम पावन है,प्रेम मुग्ध और मनभावन है
प्रेम मन का वृंदावन है,प्रेम लगता ही बहुत लुभावन है।

प्रेम प्रवाहित राग है,प्रेम अनुरक्त अनुराग है
प्रेम स्वयं प्रज्वलित आग है,प्रेम अत्यंत कोमल विभाग है।

प्रेम आलाप है,प्रेम आपस में मिलाप है
प्रेम विरह का विलाप है,प्रेम एकता का क्रियाकलाप है।

प्रेम हर्षित समाचार है,प्रेम मोक्ष का द्वार है
प्रेम जीवन का सार है,प्रेम भौंरों का फूलों से प्यार है।

प्रेम जीवंत ज्वाला है,प्रेम अमर उजाला है
प्रेम सदा मतवाला है,प्रेम मीरा के गरल का प्याला है।

प्रेम सम्पूर्ण सृष्टि है,प्रेम पतित पावन दृष्टि है
प्रेम अंत:करण की मृष्टि है,प्रेम संवेदनाओं की वृष्टि है।

प्रेम मनवांछित रुझान है,प्रेम ऊंची उड़ान है
प्रेम हृदय का आसमान है,प्रेम खुद कृष्ण भगवान है।

प्रेम स्वयं का अर्पण है,प्रेम व्यक्त निरुपण है
प्रेम मन का स्पष्ट दर्पण है,प्रेम बलिदान भरा समर्पण है।

प्रेम सदैव रहता हर्षित है,प्रेम तर्षित है
प्रेम सबको अपनी ओर करता आकर्षित है,प्रेम कर्षित है।

प्रेम याचिका है,प्रेम सदाबहार नायिका है
प्रेम चित्राक्षयिका है,प्रेम भाव की परिचायिका है।

पूर्णतः मौलिक स्वरचित सृजन की अलख
आदित्य कुमार भारती
टेंगनमाड़ा, बिलासपुर,छ.ग.

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