Nov 18, 2016 · मुक्तक
Reading time: 1 minute

प्रीत तपस्या है उसकी पर बात किसी ने कब मानी

प्रीत तपस्या है उसकी पर बात किसी ने कब मानी
विष का प्याला भी पी डाला राणा की बन कर रानी
बाँध पाँव में घुँघरू नाची इकतारा ले हाथों में
नाम जपे बस गिरधर गिरधर होकर मीरा दीवानी
डॉ अर्चना गुप्ता

1 Like · 4 Comments · 335 Views
Copy link to share
Dr Archana Gupta
984 Posts · 103.6k Views
Follow 60 Followers
डॉ अर्चना गुप्ता (Founder,Sahityapedia) "मेरी तो है लेखनी, मेरे दिल का साज इसकी मेरे बाद... View full profile
You may also like: