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“प्रीत जिया को दुलराती है” (गीत)

Dr.rajni Agrawal

Dr.rajni Agrawal

गीत

August 28, 2017

प्रीत जिया को दुलराती है

रात चाँद के साथ बिताकर
रजत चाँदनी मन भाई है।
प्रमुदित मन से उन्मादित हो
रजनी ने ली अँगड़ाई है।
अलसाए सपनों से जागी-
कोमल काया मदमाती है।
प्रीत जिया को दुलराती है।।

भोर में रश्मि आच्छादित नभ
भानु के संग इठलाती है।
विरह वेदना सहकर रजनी
नीली चूनर सरसाती है।
तपिश देह की दूर हो गई-
धवल रूपश्री मुस्काती है।
प्रीत जिया को दुलराती है।।

निर्मल जल में नहा प्रेम से
धवल रूप श्रृंगार किया है।
माँग सितारे फूल सजाए
प्रीतम ने आगोश लिया है।
खिली रजत सी कोमल काया-
देख चंद्र मुख इतराती है।
प्रीत जिया को दुलराती है।।

डॉ. रजनी अग्रवाल “वाग्देवी रत्ना”
संपादिका-साहित्य धरोहर
महमूरगंज, वाराणसी(मो.-9839664017)

Author
Dr.rajni Agrawal
 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका। उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न"... Read more
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