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प्रियतमा

Suresh Kant Sharma

Suresh Kant Sharma

कविता

July 21, 2016

ख्यालो की बगीया हो
फूलो की क्यारी हो
पूनम की चाँदनी
चकोर की दीवानगी
और सपनो की रवानी हो
पल में जीना पल में मुरझाना
दर्पण के जैसी नादानी हो
दिल के किताब की कोई शायरी
सौंदर्य को उकेरती करती कोई सरिता हो
संग-ए-मरमर से तराशा खुदा ने तेरे बदन को..
परी के जैसी कोमलता है
और बुलबुल के जैसी चंचलता है
पलकों के ख्वाब हो तुम
फूलों के पराग हो तुम ।
… गाती जो गीत कोयल
वो गीत लाजवाब हो तुम ।
चांदनी चिटकती रातों में
और मदहोशी छा जाती है
ऐसी मनोहारी मुरत तुम हो ।
एक दिलरुबा हो दिल में
जो हूरों की परी से कम नहीं हो…।।कांत।। सुरेश शर्मा

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Author
Suresh Kant Sharma
समाजसेवी,कविता लेखन राजकीय सेवारत,निशक्तजन सेवा संगठन का सदस्य एवं राष्ट्रीय गौ रक्षावाहिनी का मानद सदस्य।श्रीपरशुराम इंटरनेशनल संगठन का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष।
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