कविता · Reading time: 1 minute

प्रियतमा

ख्यालो की बगीया हो
फूलो की क्यारी हो
पूनम की चाँदनी
चकोर की दीवानगी
और सपनो की रवानी हो
पल में जीना पल में मुरझाना
दर्पण के जैसी नादानी हो
दिल के किताब की कोई शायरी
सौंदर्य को उकेरती करती कोई सरिता हो
संग-ए-मरमर से तराशा खुदा ने तेरे बदन को..
परी के जैसी कोमलता है
और बुलबुल के जैसी चंचलता है
पलकों के ख्वाब हो तुम
फूलों के पराग हो तुम ।
… गाती जो गीत कोयल
वो गीत लाजवाब हो तुम ।
चांदनी चिटकती रातों में
और मदहोशी छा जाती है
ऐसी मनोहारी मुरत तुम हो ।
एक दिलरुबा हो दिल में
जो हूरों की परी से कम नहीं हो…।।कांत।। सुरेश शर्मा

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