प्रिंसिपल की घरवाली......

एक लड़की थी अनजानी सी दुनिया उसपे मरती थी,
उठकर पहले खाना खाती बाद में पूजा करती थी,
अनजानी सी सड़कों पर वो घुमा-फिरा करती थी,
लाइट आने पे टीवी देखे जाने पे वो पढ़ती थी,
उसका मुखड़ा देखकर हर कोई उसपे मरता था,
मैं सात सौ नंबर पर था जो उससे प्यार करता था,
उसको बिना देखे मुझे नींद भी न आती थी,
मेरे कान फट जाते जब वो गाना गाती थी,
उसकी आँखों को देखकर ऐश्वर्या राय भी शर्मा जाएँ,
चाल तो उसकी ऐसी थी की श्री देवी घबरा जाएँ,
और रंग कैसे बयां करूँ क्योंकि वो थोड़ी काली थी,
आगे बोलना उचित नही वो हमारे प्रिंसिपल साहब की घरवाली थी।

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