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प्रार्थना

MOTIPRASAD SAHU

MOTIPRASAD SAHU

कविता

October 11, 2017

प्रार्थना

आओ करें मिल प्रार्थना
घर निकल लौटें सुरक्षित मिल करें हम प्रार्थना।।
बहू बेटी हों सुरक्षित मिल करें हम प्रार्थना।
शिशु करें आनंद क्रीड़ा अपहरण का भय न हो।।
साजिशों से बच रहे हम नींद का भी क्षय न हो।
हों खुली जब खिड़कियां तब दुष्ट की नजरें न हों।।
जर जमीं जोरू सुरक्षित लूट की खबरें न हों।
भूख का क्रंदन न हो अन्न की भरमार हो।।
व्यवहार में हो सौम्यता और शान्ति का अखबार हो।
हाथ केवल अब यही कि मिल करें हम प्रार्थना।।
आओ करें हम प्रार्थना ।।

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MOTIPRASAD SAHU
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