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सुबह ना आए, सुजन यदि दीन है|

बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक

मुक्तक

May 1, 2017

चेतना बिन नर ,कहाँ स्वाधीन है |
ज्ञानमय आलोक तज,दमहीन है |
तम जहाँ पर है, वहाँ पर कभी भी
सुबह नाआए,सुजन यदि दीन है |

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

“जागा हिंदुस्तान चाहिए” कृति का मुक्तक

01-05-2017

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Author
बृजेश कुमार नायक
कोंच,जिला-जालौन (उ प्र) के बृजेश कुमार नायक साहित्य की लगभग सभी विधाओं के रचनाकार हैं |08मई 1961को ग्राम-कैथेरी(जालौन,उ प्र)में जन्में रचनाकार बृजेश कुमार नायक की दो कृतियाँ "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" प्रकाशित हो चुकी है |पूर्व राज्य... Read more
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