सुबह ना आए, सुजन यदि दीन है|

चेतना बिन नर ,कहाँ स्वाधीन है |
ज्ञानमय आलोक तज,दमहीन है |
तम जहाँ पर है, वहाँ पर कभी भी
सुबह नाआए,सुजन यदि दीन है |

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

“जागा हिंदुस्तान चाहिए” कृति का मुक्तक

01-05-2017

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