प्राण vs प्रण

प्राण भले ही चल जाएगा ।
पर प्रण न कभी जाएगा ।
कहा जो हमने था तुमसे ।
दृढ है अटल चाहे रहूं गम मे ।
भले क्यूं ही न मेरा सिर कट जाएगा ।
पर प्रण न कभी जाएगा ।
प्राण भले ही चल जाएगा ।

हो रैन -दिवस या कोई विवशता ।
चाहे हो कोई उत्कटता ।
सब कुछ ही हम त्रण जाएंगे ।
कदम जब आगे रख ही दिया ।
मुश्किल है हम पीछे हट जाएंगे ।
प्राण भले ही चल जाएगा ।
पर प्रण न कभी जाएगा ।
तुम रहो पूरे प्रेम विह्वल में ।
या फिर अपने खुशियो के हलचल मे ।
पल -पल, कल-कल नई राह के सफर में ।
ध्यान है हमने जिसपर लगाया ।
मुश्किल है हम भटक जाएंगे ।
प्राण भले ही चल जाएगा ।
पर प्रण न कभी जाएगा ।
विश्वास रखो हो गर हमपर ।
चाहे खुशी हो या संकट का कहर ।
नाम हमारा जो तुम लेना ।
वहां पर आके डट जाएंगे ।
प्राण भले ही चल जाएगा ।
पर प्रण न कभी जाएगा ।
रघुवर कुल के हम तिलक है ।
न्याय मिले सबका हो गनीमत ।
गम के अंधेरे छट जाएंगे ।
प्राण भले ही चल जाएगा ।
पर प्रण न कभी जाएगा ।
कविवर मै आनन्द हूं कहता ।
विषप्याला रूद्र सा -पी जाएंगे ।
गर इसी मे हो भलाई सबकी ।
आफत को हम चट कर जाएंगे ।
प्राण भले ही चल जाएगा ।
पर प्रण न कभी जाएगा ।

🔯🔯Rj Anand Prajapati 🔯🔯

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