प्राकृतिक के गोंद मे शान्ति मिलता है ।

बैठ किनारे शान्ति मिलती है ।
उन सफेदो के बीच तालाबो पर ।
छपाक से है ढेले मारते ।
उसकी आवाज निकलते ही ।
लगता है मछली कलबलाती है ।
सारे रोग शोक दूर हो जाते है ।
ये प्राकृतिक की ही सब करामाते है।

Rj Anand Prajapati

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