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प्रश्न पूछते थकते पांव

Laxminarayan Gupta

Laxminarayan Gupta

कविता

July 21, 2016

प्रश्न पूछते थकते पांव
कितनी दूर रहा अब गाँव

पद चिन्हों पर चलते चलते
जंगल तो कर आये पार
पथरीली चट्टानें भी हम
छोड़ चुके है अब उस पार

चलने से पहले बोला था
देखो वह दिख रहा निशान
पर पड़ाव भी दिखा न अब तक
क्षण क्षण डीएम होती बेजान

रीड झुकी कंधे झुक आये
जनगण मन अधिनायक गाते
जाने कबतक समय चलेगा
जयकारों पर हाथ उठाते

प्रश्न पूछते थकते पांव
कितनी दूर रहा अब गाँव

Author
Laxminarayan Gupta
मूलतः ग्वालियर का होने के कारण सम्पूर्ण शिक्षा वहीँ हुई| लेखापरीक्षा अधिकारी के पद से सेवानिवृत होने के बाद साहित्य सृजन के क्षेत्र में सक्रिय हुआ|
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