*प्रभु की दुआ*

पांडवों को प्रभु की दुआ मिल गई!
साथ उनकी निराली अदा मिल गई!!
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तीरगी चीरने आज जुगनू चले!
रोशनी की उन्हें जो सदा मिल गई!!
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भाव के पारख़ी हैं मे’रे ये नयन!
अब निगाहों में हमको हया मिल गई!!
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इस कलम ने किया है अनोखा असर!
बिन कहे शारदे की दया मिल गई!!
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हर घड़ी साथ मिलके रहा जो बशर!
बात उसकी सभी से जुदा मिल गई!!
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रास्ता नेकियों का हमें क्या मिला!
दिलनशीं फ़िर मुसाफ़िर वफ़ा मिल गई!!
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धर्मेन्द्र अरोड़ा “मुसाफ़िर”
(9034376051

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