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प्रधानमंत्री या सेवक

मेरे नहीं है कोईआगे।
मेरे नहीं है कोईपीछे।
भारतमाता की रक्षा में,
इसीलिए हूँ आगे-आगे ।
पीछे केवल प्यार आपका,
जो मुझको संबल देता है,
यही भरोसा , यही प्यार ही,
नई ऊर्जा गति देता है।
प्रधानमंत्री न मानो मुझको,
इतना ही बस दे दो हक ।
युगों-युगों तक सदा आपका,
बना रहूँ केवल सेवक।
बना रहूँ केवल सेवक,
भ्रष्टाचार को रोक सकूँ ।
जहाँ-जहाँ जो भी त्रुटियाँ हों,
उन्हें ठीक से टोक सकूँ ।
जनता के ही बलबूते पर ,
कालाधन भी खोज रहा हूँ ,
है ज़रूरत जितने धन की,
उतना सबको छोड़ रहा हूँ ।
शेष देश को लौटा दो तुम,
मानो न इसमें तुम खोट ।
देश बदलना,माँग समय की,
इसीलिए तुम बदलो नोट ।
इसीलिए तुम बदलो नोट ।

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ईश्वर दयाल गोस्वामी
ईश्वर दयाल गोस्वामी
सागर , मध्यप्रदेश
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-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक जन्म-तिथि - 05 - 02...