घनाक्षरी · Reading time: 1 minute

सोमवार शिवभक्ति

सावन सुहाना आया,
हरीतिमा जग छाया,
भोले की कृपा है पायी,
जयति शिव बोल।

झूम रही डाली डाली,
मस्त होके मतवाली,
सूरज भी काफी खुश,
नेत्र अपना खोल।

तन तन घंटा बोले,
मन शिव नाम डोले,
बेल पत्र चढ़ाकर,
त्रिदेव जय बोल।

पहला सोमवार है,
रिमझिम फुहार है,
दान दया कर कुछ,
कर भक्ति अनमोल।

मुख पर बहार है,
नागों का गले हार है,
जग को जगा रहे हैं,
डमरू और ढोल।

सावन की बेला आयी,
हरि प्रीत मन छायी,
सुहानी घड़ी में सब,
भक्ति का रस घोल।

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अशोक शर्मा, कुशीनगर, उ.प्र.
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