23.7k Members 49.8k Posts

प्रथम गुरू माँ ही होती

सार निछावर कर डाली है
भूमि वास कि वह माली है
लहू से अपने फूलों को सींचती
प्रथम गुरु माँ ही होती

स्वर लोरी मुख माँ की वीणा
सहती सदैव कुनबे में पीड़ा
कभी नहीं राजनीति करती
प्रथम गुरु माँ ही होती

खिलत मनोरम रूप कमल-सा
करुण भाव शैवालिनी जल-सा
सोम प्रकाश देती यश-कीर्ति
प्रथम गुरु माँ ही होती

त्रिलोक में माँ जैसी नहीं देवी
माँ में समाएं कोटि रवि
छोडू नहीं माँ तेरी भक्ति
प्रथम गुरु माँ ही होती

थाली सजाकर करू मैं आरती
अखंडता की माँ है शक्ति
माँ साक्षात प्रभु की मूर्ति
प्रथम गुरु माँ ही होती

नाम:- नवनीत पाण्डेय (चंकी) s/o श्री रमेश पाण्डेय
पता:- ग्राम+पोस्ट:- सेवटा, तहसील :- सदर
जनपद:- आज़मगढ़, उत्तर प्रदेश, पिन कोड:- 276128

This is a competition entry.

Competition Name: "माँ" - काव्य प्रतियोगिता

Voting for this competition is over.

Votes received: 80

Like 20 Comment 25
Views 604

You must be logged in to post comments.

LoginCreate Account

Loading comments
ER.NAVANEET PANDEY
ER.NAVANEET PANDEY
Azamgarh
86 Posts · 3.3k Views
नाम:- इंजी०नवनीत पाण्डेय (चंकी) पिता :- श्री रमेश पाण्डेय, माता जी:- श्रीमती हेमलता पाण्डेय शिक्षा:-...