प्रणय प्रस्ताव

विषय :- प्रणय प्रस्ताव
विद्या :- कुण्डलिया

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【रचना】
देखा हूँ जब से तुझे, सुंदर रूप कमाल।
प्रेम अंकुरित हिय हुआ, बिगड़ गया है हाल।।
बिगड़ गया है हाल, नहीं कुछ हमको दिखता।
प्रेम पत्र अब आज, शुभे मैं तुमको लिखता।।
कहे सचिन सुन बात, भाग्य की बन जा रेखा।
हुआ हृदय बेहाल, आपको जब से देखा।।

नैना मदमाते लगे, स्वर्ण सरीखे गात।
कुन्तल कारे मेघ से, दिखे अमावस रात।।
दिखे अमावस रात, गजब की सुन्दरता है।
यौवन अजब कमाल, चन्द्र मुख मोहकता है।।
प्रेम पत्र स्वीकार, सचिन को दे दो चैना।
वक्ष हुआ बेहाल, लड़ालो मुझसे नैना।।
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मैं 【पं.संजीव शुक्ल ‘सचिन’】 घोषणा करता/करती हूँ, मेरे द्वारा उपरोक्त प्रेषित रचना मौलिक, स्वरचित, अप्रकाशित और अप्रेषित है।
【पं.संजीव शुक्ल ‘सचिन’】

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