प्रकृति

प्यार देकर प्रकृति मुस्कुरा-सी रही
गीत गाकर दिलों को लुभा-सी रही

देख लो बाग़ की मोहनी हर झलक
दिल सुगंधी हवा से घिरा अब तलक
गुण-सुधा में मुहब्बत नहा-सी रही
प्यार देकर प्रकृति मुस्कुरा-सी रही
गीत गाकर दिलों को लुभा -सी रही

कुंज-भँवरे वहाँ गीत गा झूमते
फूलों के कपोलों को भी चूमते
रति-मदनमय अदा गुदगुदाती-सी रही
प्यार देकर प्रकृति मुस्कुराता-सी रही

कड़कडाती हुई बिजलियों का गगन
डर दिखा भर रहा है दिलों में अमन
और वर्षा मिलन-मग बना-सी रही
प्यार देकर प्रकृति मुस्करा-सी रही
गीत गाकर दिलो को लुभा-सी रही
………………………………………….

बृजेश कुमार नायक
जागा हिंदुस्तान चाहिए एवं क्रौंच सुऋषि आलोक कृतियों के प्रणेता

-आकाशवाणी छतरपुर के कार्यक्रम अधिकारी श्री शेखर शर्मा जी के कहने पर मैने उक्त गीत लिखा तथा आकाशवाणी छतरपुर पर काव्यपाठ की रिकार्डिंग हुई
बाद में 17-07-2017को उक्त रचना के काव्यपाठ का आकाशवाणी छतरपुर से काव्यसुमन कार्यक्रम में प्रसारण हुआ|

-राघवेन्द्र ठाकुर की साहित्य पत्रिका “हिंदी सागर” के वर्ष -1 अंक -4. (अक्टूबर -दिसम्बर 2017)मे उक्त रचना प्रकाशित हो चुकी है |

02-09-2017

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