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प्रकृति,हम और वन्य जीव

MridulC Srivastava

MridulC Srivastava

लेख

May 13, 2017

प्रकृति की मनोरम कला अद्भुत,अद्वितीय,अकल्पनीय है, सुबह के लाल सूर्य का अंधकार ध्वस्त करने वाला तेज, उमंग और उत्साह के साथ हर एक प्राणी द्वारा दिनचर्या का प्रारम्भ,हरे भरे पेड़ पौधे प्राकृतिक सौंदर्य से महकते पुष्प इस भूमि को एक स्वर्ग सा उपवन बनाती है ।
कल-कल की ध्वनि करता विषाल जल प्रवाह एवं श्वेत चमकीले चादर के समान ऊंचाई से गिरते झरने व जल के झरनों से बनने वाली सूक्ष्म जल बूंदों का धूवाँ । ईश्वर ने प्रकृति को रचने में अपनी उत्कृष्ट कला का प्रयोग किया है,यह प्रकृति जीवन के लिए आवश्यक सभी वस्तुओं को हमें उपहार समान देती है, जिसका हमें सदैव कृतज्ञ रहना चाहिए ।

शाम का ढलता सूर्य और मन्द शीतल वायु, सूर्य की इन किरणों को खुले वातावरण में देखना,एक मनोरम एहसास की अनुभूति कराती है । घर की ओर लौटते पशु पक्षी,ख़ूबसूरत स्थान,प्रदूषण मुक्त और शांत शौम्य l
दिल्ली विश्व विद्यालय के नार्थ कैम्पस में साम के समय ऐसे बेहतरीन प्राकृतिक नज़ारे और विभिन्न प्रकार के पुष्प-कलियों की मोहक खुशबु से ओतप्रोत,जब सूर्य का प्रकाश लगभग ख़त्म होने को हो,आप इस स्थान की किसी ऐसी जगह से, किसी भी वृछ के नीचे से गुजारिये, पंछियो का ऐसा मधुर गुंजन-गान हो रहा होता है जिसे व्यक्त नहीं केवल और केवल अनुभव किया जा सकता है,
चहचहॉट की लगातार बह रही ध्वनि …
क्या गिटार और क्या वादन,प्रकृति के इस संगीत से कोई भी संगीतकार ऐसी धुन न बजा पाने की विफलता से निराश हो सकता है ।

प्रकृति के प्रति यह झुकाव और प्रेम स्वाभाविक है,इसे और करीब से देखने का अवसर एक यात्रा के दौरान हुँआ जब #जिम_कार्बेट उत्तराखंड जाने का एक मौक्का मिला ।
वहां की प्राकृतिक खूबसूरती और वन्य जीवों की चपलता
इसका विस्तार पूर्वक वर्णन करें, तो दो चार पुस्तके लिखी जा सकती हैं l हजारो-हज़ार प्रकार के पशु पंक्षियों तथा नदी और झरनों को घूमनो को देखने के बाद मन आनंद से परिपूर्ण था,किन्तु एक रोचक “सफारी” को जी आतुर हो रहा था,स्वाभाविक भी है कोई भी ऐसे अवसर का पूरा-पूरा आनंद लेना चाहेगा,मैन भी यही किया । “सफारी” करने की प्रबल इच्छा अब पूरी होने वाली थी, “सफारी” के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प का चुनाव मेरी पहली प्राथमिकता थी । किसी हाथी घोड़े पर बैठ कर वन क्षेत्र में घूमना बड़े शिकारी पशुओ को दावत देने जैसा ही था, जिसका जोखिम मैं बिल्कुल भी उठाना नहीं चाहता था l “सफारी” के लिए सर्वश्रेष्ठ विकल्प बंद गाडी की सवारी ही है जिसका चुनाव सहज भाव से किया गया ।
लगभग 15-20 मिनट गुजर चुके थे, वही शाम का समय और जंगली वन्य जीवो को सुरक्षित स्थान से,उनके ही प्राकृतिक आवास में उन्हें देखना मेरे लिए असीमित आनंद का एक पर्याय बन चुका था,संग बैठे अन्य साथियों में भी सभी इस आनंद के असीम उत्कर्ष का अनुभव कर रहे थे, शायद ही ऐसा कोई भी चाहता की ये वक्त गुजर जाय,ये कल्पना से परे था उससे कही बेहतर आनंदमयी चारो ओर की शान्ति,शीतलता हमे भी इस वातावरण का एक हिस्सा बना रही थी ।
इन सब पर जल्द ही विराम लगने वाला था क्योंकि अति तो अति है इसलिए सतत कुछ भी नहीं अचानक शान्ति का वातावरण भंग हुआ एक साथ विभिन्न प्रकार के अजीब आवाजो से वातवरण गूंज उठा, कुछ था वहाँ , हाँ शायद शेर ! सभी के चेहरे पर यही भाव उकर आये
हिरणों का एक झुंड तेजी से एक साथ एक झाडी में समाता जा रहा था,जब ये क्रम थमा तो जो दिखने वाला था उसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी,
यह एक बाघ था जिसने खुद के मजबूत जबड़ो में एक कमजोर दुर्बल से जीव को जकड़ रखा था,मानो वह उसके लिए कोई खेलने की वस्तु हो । यह दृश्य और हमारे बीच की दूरी 100 मीटर से अधिक नहीं रही होगी किंतु जबड़े में कसे उस सुनहले जीव के शरीर पर सने खून साफ़ दिख रहे थे अब एक खौफनाक सन्नाटा पसरा था,जंगली आवास में भी और हमारे मध्य भी बिलकुल अजीबोगरीब शान्ति हो चली थी l साथ बैठे एक साथी ने इसे भंग करते हुए कहा #जिमकार्बेट जिनके नाम पर इस अभ्यारण का नाम रखा गया है, कि एक पुष्तक है
“मैन ईटर्स ऑफ कुमाऊं” जिसमे बाघो द्वारा कुछ लोगो को खा जाने का उल्लेख है जो की सत्य माना जाता है ।
इस बात को सुन कर एक अन्य साथी ने झूझला कर डाट लगाईं,अच्छा चुप रहो ये सब बाद में बताना, वैसे भी यह इनका भोजन भर है, यही इनके जीवन जीने का तरीका है और इसी लिए यह पशु हैं ।
एक हलकी मुश्कान के साथ सभी को ये यथार्थ स्वीकारना ही था पशु-पशु का शिकार करता है और यही प्रकृति में संतुलन बनाये रखने का एक माध्यम है,जो जंगल हमारे लिए कौतूहल और रोचकता का कारण बन जाता है वास्तव में यहाँ प्रकृति के वास्तविक क़ानून के सभी स्वरूप का दर्शन मिलता है । सत्य ही है कि प्रकृति में अयोग्यो,एवं दुर्बल जीवो के लिए कोई स्थान नहीं,जो सबल है खुद को शुरक्षित रखने की काबलियत रखता है,वास्तव में जंगल में वही जीवन रूपी प्रसाद को ग्रहण करता है l
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प्रकृति या ईश्वर ने हमे जीवित रहने के लिए सभी आवश्यक चीजे,फल, फूल,अनाज आदि प्रदान की हैं जिसके लिए हम सदैव ऋणी है यह ईश्वर द्वारा प्रदान सर्वश्रेष्ठ उपहार है जिसे कल्याणार्थ प्रयोग किया जाना चाहिए,मानव जीव जंतु सभी इस उपहार से धन्य हो इसका प्रयास होना चाहिए ।
हमे सदैव शाकाहारी होना चाहिए, मांस भक्षण और जीव हत्या पशु-कृत्य हैं मानव को समाज और जीव कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए ।

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MridulC Srivastava
हीरे सजा रखे हैं तिलक सा माथे उन्हें माटी का कोई मोल नहीं, माटी ही हूं इस भूमि का,अभिमान मुझे, इस माटी का कोई मोल नहीं
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