प्यार

दिल ढूंढता है तुझको कही पर ।
चल हम पङे चाह के राह पर ।
पर हम करे क्या तुम ही बता दो ।
चांदनी का समा है ये कैसा वफा है ।
प्यार मे अपना न कोई सगा है ।
नाव कब भंवर मे टिका है ।
चलता न इसमे किसी का सिक्का है ।
कोई न मुसाफिर कही पर दिखा ।
सलामत रहे प्यार सदा ही तरह ।
इसी का अब तो कारवां चला है ।
न कोई गिला है न कोई सिला है ।
पर चलता ये अपना प्यार का डगर ।
Rj Anand Prajapati

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