प्यार हो तो ऐसा

दिल हो खुला आसमान जैसा
बातों में हो मधु जैसी मधुरता
“दुष्यंत” का विचार कहता है
सदा अटूट हो रिश्ता-नाता

प्रेम की बहती रहे अनंत सरिता
हँसती-खिलती रहे सदा चेहरा
प्यार हो तो ऐसा हो अमिट निशां
सुरभि अनुपम रंग से जीवन हो रंगा

मन पटल रहे विमल गंगा सी
खुशियों की बसेरा हो सुबह-संध्या
रिश्तों में सदा-सदा ही महक रहे
जैसी कोई फूलों की महकती बगियाँ

मंजु-मंजुल हो जाए जीवन हमारा
सदा सत्य रहे और भी निखरता
परिवार, देश और समाज में
हम रहे या न रहे,रहे एकता अखंड़ता

कवि:- दुष्यंत कुमार पटेल”चित्रांश”

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