प्यार भरा था सीने में पर

प्यार भरा था सीने में, पर नफरत तुमने बोया है
मैंने अपने घावों को निज अश्कों से ही धोया है
कोई नहीं यहां सच्चा ये दुनिया मतलब वाली है
प्रेम दोस्ती का रिश्ता मुझको अब लगता जाली है
प्रेम तुम्हारा पाने को मैं ध्रुव तारा बन बैठा हूं
कभी दिशा ना बदले जिसकी वो धारा बन बैठा हूं।
यादों का ही जाम तुम्हारे रात दिवस मैं पीता हूं
जिंदा लाश बना हूं लेकिन तेरे कारण जीता हूं
पीर जिगर में बढ़ता है तो सिसक सिसक कर रोता हूं
खुदा कसम ऐ दोस्त मेरे, मैं खुली आंख से सोता हूं
आंखों से बरसात मेरे बिन मौसम के ही होती है
दर्द हृदय में होता है फिर आंखें काहे रोती हैं
बिन तेरे मेरा जीवन अब सूना सूना लगता है
पीर मेरे इस दिल का हर पल दूना दूना लगता है
आखिर मुझे बताओ क्यों तुम ऐसे मुझको तोड़ गए
बीच भंवर में मेरी नौका आखिर क्यों तुम छोड़ गए
है इतना एहसास जल्द ही पीड़ा से भर जाऊंगा
माफ़ मुझे कर देना पागल जिस दिन मैं मर जाऊंगा।
शक्ति त्रिपाठी देव

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