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प्यार निखारता…छंद कुंडलिया

Radhey shyam Pritam

Radhey shyam Pritam

कुण्डलिया

October 26, 2017

कुंडलिया
प्यार त्याग विश्वास है,दिलों का बंधन है।
दूर रहकर भी तड़फ़े,हृदय संवेदन है।।
हृदय संवेदन है,प्यार सर्वोपरि जग में।
स्वर्ग महसूस करे,पा इसे यारा दृग में।
सुन प्रीतम की बात,प्यार दिल की एक धार।
घृणा मारती सदा,निखारता जीवन प्यार।
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व्यस्त रहिए इतना तुम,चुगली-वक़्त न बचे।
चुगली जोंक है यार,काटे रक़्त न बचे।।
काटे रक़्त न बचे,बुराई छोड़कर चलो।
संस्कार अपनाओ,दिलों को जोड़कर चलो।
सुन प्रीतम की बात,अच्छाई न होय अस्त।
तमाम ज़िंदगी तुम,ख़ुद को रखिए बस व्यस्त।
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हँसी के फुहारे छोड़,टैक्स नहीं लगेगा।
ज़मा दौलत यहीं रहे,पुण्य ही चमकेगा।।
पुण्य ही चमकेगा,नेकी कर कुएँ डालो।
हर वक़्त खुश रहिए,खुशी सबको दे डालो।
सुन प्रीतम की बात,रोग में ज़िंदगी धँसी।
तो समझना भैया,ग़ायब ज़िंदगी से हँसी।
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राधेयश्याम बंगालिया “प्रीतम”
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