कविता · Reading time: 1 minute

तू नहीं तो.. तेरी आस सही

प्यार नहीं तो तकरार सही
इकरार नहीं तो इनकार सही
जी ले जिंदगी, हो हर हाल मे खुश
तु पास नहीं तो, तेरी आस सही

तेरी बातों मे मेरा जिक्र,नहीं
है तुझको मेरी, फिक्र नही
वक्त बे वक्त, चली आती है
यूँ मुझको वो, तड़पाती है

तेरी यादों का कोई वक्त नहीं
दरवाजा मन का, इतना सख्त नहीं
मै खुद मे ही, सिमट जाती हूँ
जब घेरे मे तेरी यादों के आती हूँ

फिर मन को, थोड़ा समझाती हूँ
जख्म, तेरी जुदाई का, सह जाती हूँ
मै तेरी फितरत मे, कही भी नहीं
तू और किसी की, किस्मत ही सही

हम यूँ ही बसर कर लेंगे
जिंदगी की भी, सहर कर लेंगे
जी ले जिंदगी, हर हाल मे खुश
तु पास नहीं तो, तेरी आस सही

रेखा कापसे
होशंगाबाद”म.प्र.”

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