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प्यार……… कृष्ण सैनी

krishan saini

krishan saini

कविता

March 7, 2017

ना हो शब्दो से बयाँ ये
ना ही कोई परिभाषा
हर किसी के मन मे है
दिलेस्पर्श की अभिलाषा
काम है इसका
दो रूहो को जोड़ना
आसाँ नही इसे
इक बार मिलाके तोडना
प्यार,इक भाव है
कडी धूप मे छाव है
प्यार,इक तपस्या है
जिसमे सारी खुशिया है
प्यार,इक समर्पण है
जिसमे सब कुछ अर्पण है
ना जाती धर्म का रंग है
केवल प्रिया का संग है
प्यार,भरोसा और लगाव है
अलगाव मे बडा घाव है
ना हो शब्दो से बयाँ ये
ना ही कोई परिभाषा
हर किसी के मन मे है
दिलेस्पर्श की अभिलाषा
.
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.
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कृष्ण सैनी

Author
krishan saini
पता-विराटनगर जयपुर(राजस्थान) जीवन को मॉ शारदे की सेवा मे लगाने का सपना Mo.no.-9782898531 Twitter-krish24496
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