कविता · Reading time: 1 minute

प्यार की बदली नैनों से बरसती

*प्यार की बदली नैनों से बरसती*
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हसीं चेहरे से नजर नहीं हटती,
आँखें देखती हैं पर नहीं थकती।

चाँद सा रोशन मुख है जुगनू सा,
काली लटें मस्तक पर रहें सजती।

लाख कोशिशें की नजर फेरने की,
जाने क्यों नजरें वहीं जा अटकती।

छन छन की ध्वनि कानों में गूँजती,
पाँव की पायल रहती है खनकती।

माथे पर बिन्दी सुन्दर है लगती,
रात अन्धेरी हो तारों से चमकती।

झील से गहरे हैं नशीले दो नैन,
प्यास प्रेम की है जरा नहीं बुझती।

मनसीरत दीवाना दिन रात निहारे,
प्यार की बदली नैनों से बरसती।
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सुखविंद्र सिंह मनसीरत
खेड़ी राओ वाली (कैथल)

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Author
सुखविंद्र सिंह मनसीरत कार्यरत ःःअंग्रेजी प्रवक्ता, हरियाणा शिक्षा विभाग शैक्षिक योग्यता ःःःःM.A.English,B.Ed व्यवसाय ःःअध्ययन अध्यापन अध्यापक शौक ःःकविता लिखना,पढना भाषा ःःहिंदी अंग्रेजी पंजाबी हिन्दी साहित्यपीडिया साईट पर प्रथम रहना प्रतिलिपि…
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