प्यार की फिर अधूरी कहानी हुई

प्यार की फिर अधूरी कहानी हुई
तू न राजा हुआ मैं न रानी हुई

प्यार ने भर दिये इंद्रधनुषी से रँग
मन की चुनरी मेरी आसमानी हुई

आज हैवानियत इतनी इंसान में
देख इंसानियत पानी पानी हुई

चल रही हैं बसंती बयारें तभी
आभा धरती के चेहरे की धानी हुई

मौत मेहमान बन जाती खुद ही वहाँ
ज़िन्दगी की जहाँ मेज़बानी हुई

चलना तो आ गया जल्दी जल्दी यहाँ
सोच पर धीरे धीरे सयानी हुई

बढ़ते ही यूँ गये सपनों के काफिले
देखते देखते उम्र ये फानी हुई

ज़िन्दगी में मिली ठोकरें भी बहुत
दूर थोड़ी भी गर सावधानी हुई

प्यार मेरा हुआ “अर्चना’ की तरह
मैं भी मीरा के जैसी दिवानी हुई

13-01-2018
डॉ अर्चना गुप्ता

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