प्यार की दुनिया बसानी रह गई

बात जो दिल की बतानी रह गई
प्यार की दुनिया बसानी रह गई

चाँद तारों साथ महकी रात भर
अब अकेली रात रानी रह गई

दूसरों की पूरी करते रह गए
आखिरी अपनी कहानी रह गई

प्यार से अपने बिछड़ ये ज़िन्दगी
बोझ की बस राजधानी रह गई

ये अँधेरे इसलिए इतने घिरे
रौशनी इनको दिखानी रह गई

देखकर अपराध धोखे हर तरफ
अब यहाँ बस सावधानी रह गई

इस बदलते वक़्त के सँग अर्चना
अब मुहब्बत कब पुरानी रह गई

डॉ अर्चना गुप्ता

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डॉ अर्चना गुप्ता (Founder,Sahityapedia) "मेरी तो है लेखनी, मेरे दिल का साज इसकी मेरे बाद...
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