प्यार की वापसी

ये सुना है हमने फिज़ाओं से
मेरे शहर में लौट आया है वो
मुझसे दूर जाने की ज़िद में
ये शहर छोड़ गया था जो ।।

मानता हूं की मुझे मनाना नहीं आया
दिल में छुपा प्यार पर जताना नहीं आया
उसकी यादों में कई शाम काटी है अकेले
कैसे पूछूं कभी मेरा ख्याल नहीं आया।।

रूठना भी प्यार में एक पहलू है
परन्तु ऐसे छोड़ जाना क्या अच्छा है
तुम्ही बताओ इतना प्यारा रिश्ता
तोड़कर यूं चले जाना क्या अच्छा है।।

जो दिल के करीब होते हैं लोग
उन्हें कभी ऐसे सताया नहीं जाता
हमेशा प्यार से समझाते है उन्हें
उन पर गुस्सा जताया नहीं जाता ।।

मेरी कमी वहां उसे भी तो खली होगी
कोई तो बात उसके दिल में लगी होगी
जो वो इस तरह वापिस शहर आ गया
मुझमें कोई बात तो उसे अच्छी लगी होगी ।।

मन नहीं लगा मेरे बिन उसका
या नाराजगी उसकी दूर हो गई
जो भी रहा हो कारण इसका
मेरी तो फिर किस्मत बदल गई ।।

ज़िन्दगी फिर से जिंदगी लग रही है
तुम जो मिल गए फिरसे जहां मिल गया
वीरान हो गया था मेरे दिल का आंगन
फिरसे प्यार का हसीं फूल खिल गया ।।

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