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प्यार का बलिदान भाग-02

मनीष अपने बुआ के घर शादी में चला गया 3 से 4 दिन बीत गया इधर प्रियंका भी अपने घर पर आ गई थी
मनीष:-प्रणाम बुआ कैसी हो…!
सोनी:-ठीक हूं और सब लोग कैसे हैं…!
मनीष:-ठीक है बुआ मैं आता हूं मंदिर पर से हनुमान जी के थोड़ी देर में…!
सोनी:-जल्दी आना सारा काम तुम लोगों को ही करना है….!
शाम के पहर में मनीष मंदिर में जाता है तालाब के पास मंदिर में अंदर घंटा बजाता है हाथ जोड़कर…!
मनीष:-जय बजरंग-बली की भागवन हे प्रभु आप तो सब जानते हो आप से कुछ छुपा नहीं है पता नहीं प्रियंका कैसी होगी मेरा ख्याल भी कर रही होगी कि नहीं यहां पर तो मोबाइल में नेटवर्क भी नहीं है और दूसरे की मोबाइल भी नहीं है जिस से बात करू….!
इधर प्रियंका के घर पर उसकी सखी आती है….!
सुनीता:- चाची प्रियंका कहां है…!
स्नेहा:-छत पर है….!
सुनीता:-प्रियंका आ गई 4 दिन हो गया मिलने क्यों नहीं आई किसी का जादू तेरे ऊपर तो नहीं चल गया जो मुझ जैसी सहेली को भी भूल गई….!
प्रियंका:- नहीं ऐसी बात नहीं है वहां पर इतना काम था कि आते-आते तबीयत खराब हो गई….!
सुनीता:-चल झूठ मत बोल मुझसे नहीं छुपा पाओगी चलो बताओ कौन था….!
प्रियंका:- एक मौसी का भांजा था जो बहुत ही प्यारा और चंचल स्वभाव का था उसी की याद आ रही थी इसीलिए छत पर आ गई…….!
सुनीता:-पूरी बात बताओ….!
सुनीता को प्रियंका पूरी घटना का चित्रण अपने कोमल वाणी से सुनाती है….!
सुनीता:-उसका फोन आएगा जरूर तेरा जादू ही ऐसा है किसी पर चल जाए…!
प्रियंका:-कैसे करेगा,बोला था कि बुआ के घर पर नेटवर्क नहीं पकड़ता है तो एक हफ्ता फोन नहीं कर पाऊंगा और बोला कि वहां से आने के बाद फोन जरूर करूंगा…!
सुनीता:-ज्यादा याद मत कर,लड़के ऐसे ही फसाते हैं सभी लड़कियों को…!
प्रियंका:- ऐसा नहीं है मेरे को बोला तुम मेरी बेस्ट फ्रेंड हो मैं उसको बहुत मिस कर रही हूँ,वह भी याद कर रहा होगा….?
यहाँ….!
मनीष:-फूफा जी बताओ ना रिचार्ज की दुकान कहां पर है मेरे फोन में रिचार्ज करवाना है…!
रघुनाथ:- बाजार में पेट्रोल पंप के बगल में एक दुकान है वही करता है…!
मनीष:-ठीक है…!
शादी का कर्यक्रम भी बीत गया बहुत अच्छी तरह….!
मनीष:-बुआ चलो अब हम लोग घर चलते हैं फिर आएंगे 8:00 बजे मोड़ पर बस आएगी सीधे गांव के मोड़ पर उतार देगी,नहीं तो घूम कर जाना पड़ेगा…!
सोनी:-ठीक है मिठाई लेते जाओ अम्मा को दे देना…!
रीता:- दीदी बैग में डाल दो,मैं कपड़ा पहन रही हूँ…!
मनीष:- जल्दी करो 7:00 बज गए हैं बस छूट जाएगी….!
सोनी:-नहीं छूटेगी…!

वहाँ से सूरजपुर चौराहें पर बस रुकी
मनीष:- सांस में सांस आया, वहां पर तो जैसे बेचैन हो गयी था…..!
रीता:-क्या हुआ चलों चाय पी लो,समोसा खा लो फिर घर चलते हैं
मनीष:-मैं नहीं समोसा खाऊंगा ठंडा पीउंगा
रीता;-देवर एक पान लगावा और मनीष को ठंडा पिला दो….!
दुकानदार:-ठीक है भाभी कहां से आ रही है…!
रीता:-बड़ी वाली जीजी के लड़की की शादी थी कल, वही से आ रहे है…!
दुकानदार:- मुकु लो ठंडा…!
मनीष:-चाचा रुको 10 मिनट अभी आ रहा हूं बात कर लू, फोन पर,फोन भी नहीं लग रहा है दूसरी बार लगाता हूं घंटी गई प्रणाम मामी कैसी हैं मुकु बोल रहा हूँ…!
स्नेहा:-आशीर्वाद तब से गए ,फोन आज कर रहे हो और सब लोग कैसे हैं दीदी कैसी हैं…!
मनीष:-सभी लोग ठीक हैं प्रियंका कहां है बात करनी है स्नेहा:-प्रियंका मुकु का फोन है बात करना चाहता है…!
प्रियंका:-आई कपड़ा फैला रही हूँ,…!
स्नेह:-ओ तो बेटा छत पर कपड़ा फैला रही है…!
प्रियंका:-हेलो मनीष…!
मनीष:- हेलो कैसी हो…!
प्रियंका:- तुम कैसे हो और 10 दिन बाद फोन कर रहे हो…!
मनीष :-तुमको तो बताया था कि बुआ के घर शादी में जाना था वहां पर फोन ही नहीं लग रहा था और तुमने मुझको याद किया कि नहीं,जाने के बाद…..!
प्रियंका:-क्यों नहीं यार,तुम्हारे फोन का इंतजार कर रही थी आज आया ही गया…!
मनीष:-ये तो मामा का फोन हैं कहां है….!
प्रियंका:-ओ तो आज फोन चार्ज लगाकर गांव में गए हैं एक काम करो घर का नंबर ले लो उसी पर करना पापा तो हमेशा बाहर ही रहते हैं….!
मनीष:-ठीक है बोलो नम्बर…!
प्रियंक:- नोट करो…नोट हो गया…!
मनीष:;हां हो गया…!
प्रियंका:- भैया कैसे हैं बुआ कैसी हैं…!
मनीष:-ठीक है सब लोग,एक बात बोलू मेरे से बात करनी है ,तो दोस्त की तरह ही बाते होंगी और हमारे तुम्हारे में दूसरा रिश्ता नहीं रहेगा…!
प्रियंका:-ठीक है मुझको….!
मनीष:- वादा करो….!
प्रियंका:- वादा करती हूँ,दोस्ती की कसम…..!
मनीष:-मेरा भी वादा तुमसे,मरते दम तक यह रिश्ता निभाता रहूंगा मरने के बाद ही खत्म होगा….!
प्रियंका:- ठीक है….!
रीता:-ठंडा पी लो और चलो…!
मनीष:-फोन रखता हूँ,ठीक…मम्मी बोल रही है घर पर जाने को घर पर जा कर फिर फोन करता हूँ……!
10 दिन बीत जाते है 12वीं का रिजल्ट आ जाता है सभी लोग एक दूसरे को फोन करके रिजल्ट बता रहे थे मनीष भी अपने पूरे रिश्ते में सबको बता दिया था अब केवल प्रियंका ही बाकी थी वहां फोन करता है…!
मनीष:-हेलो मामा प्रणाम मैं पास हो गया प्रथम श्रेणी में…!
देवेन्द्र:- खुश रहो अच्छी बात है लगे रहो…!
मनीष:- हा मामा,प्रियंका कैसी है रिंकी का कितना नंबर आया है…!
देवेन्द्र :- वह भी प्रथम श्रेणी में पास हुई है
मनीष:-मामी से बात करवाईये,…!
देवेन्द्र:-स्नेहा मुकु का फोन है …!
स्नेहा:-प्रियंका फोन लाओ पापा के पास से….!
देवेंद्र:-प्रियंका लो फोन अपने मम्मी को दे दो…!
प्रियंका:-हेलो पास हो गए मिठाई कब खिला रहे हो….!
मनीष:-खिला दूंगा क्यों टेंशन ले रही हो अभी इंजीनियरिंग में एडमिशन तो बाकी है अगले महीने लखनऊ में ही हो जाएगा,तब खिला दूँगा…!
प्रियंका:-प्रेम का रिज़ल्ट्स कैसा आया….!
मनीष:-द्वितीय श्रेणी में पास हुआ है मेरे से 15 नम्बर कम आये है…!
प्रियंका:-पास तो हो गया कभी मेरे घर आओ यहां पर…!
मनीष:-ठीक है कैसे आते हैं बता देना…!
प्रियंका:- पापा से पूछ लेना बता देंगे…!
मनीष:-मामी को फोन दे-दो,हाल-चाल हो जाए…!
प्रियंका:- मम्मी मुकु बात करना चाहता है लो बात करलो
मनीष:-प्रणाम मामी कैसी है,…!
स्नेहा:-कैसे हो मुकु..!
मनीष:;पास हो गया मामी, अब इंजीनियरिंग में एडमिशन लेना बाकी है…!
स्नेहा:- जरूर हो जाएगा बेटा, मेहनत कर रहे हो तो आगे बढ़ो गे ही….!
रविंद्र-रवि:-मुकु भाई मिठाई खिलाओ प्रथम श्रेणी में पास हो….!
मनीष:-रखता हूँ मामी फोन दोस्त आ गए हैं…!
स्नेहा:- ठीक है..!
रवि:-चलो पार्टी करो भाई…!
मनीष:- ठीक है भाई करता हूं शाम को चलते हैं बाजार तब करता हूँ…!
पीयूष:-अभी चलो तालाब पर……!
पीपल के पेड़ के नीचे सीढी पर बैठ जाते हैं सब लोग
रवि:-हम लोग भी 12वीं की परीक्षा देना है इसबार…!
नगेंद्र:- देखो पास होते हैं कि नहीं…!
मनीष:-पढ़ोगे तो जरूर पास होंगे….!
रवि:-जब पास हो गए तो बातें करोगे ही….!
मनीष खुश तो था लेकिन शांत बैठा था और उसके चेहरे पर एक सन्नाटा छाया हुआ था…!
रवि:-मुकु तुम शांत क्यो हो क्या बात है बोलो इतना खुश तो थे थोड़ी देर पहले अब उदास बैठे हो…!
मनीष:- कुछ नहीं यही सोच रहा हूं कि जिंदगी कहां से कहां आ गई नई सीढ़ी पर कदम रखना है कैसे आगे बढ़ेंगे और इस खुशी में मेरी दोस्त, मेरे साथ होती तो यह खुशी मेरी चार गुनी होती….!
नगेन्द्र:-क्या हुआ कौन दोस्त कोई लड़की तो नहीं…!
मनीष:- मेरी प्रिय मित्र, बहुत अच्छी है तुम सब जैसी है लेकिन तुम्हारे जैसी शरारती नहीं तुम लोग तो बात बात में मजाक ही करते हो…!
रवि-पीयूष:-चल कोई बात नहीं होता है
चलो सब लोग तालाब में नहाते हैं मजा आएगा…!
मनीष:-ठीक है चलो..!
समय-समय पर प्रियंका और मनीष बातें करते रहते है,मनीष का इंजिनीरिंग में एडमिशन हो जाता है
एक दिन मनीष फोन करता है प्रियंका के पापा पर…!
मनीष:;हेलो मामा कैसे हैं
देवेन्द्र:-खुश रहो ठीक है परीक्षा दिलाने आया था, प्रियंका को चोट लग गई है बाद में बात करता हूँ,फोन रखता हूँ..!
मनीष:-ठीक है फोन कट गया क्या हो गया पता नहीं कैसे गाड़ी चला रहे थे गिरा दिया, ना जाने कितना चोट लगी है आखरी पेपर था उसमें भी इस तरह मामा भी गाड़ी चला रहे थे मन घबरा रहा था सुबह से शाम तक खबर मिल ही गई…!
शाम के 7:00बज रहे थे तभी मनीष के भैया
राजू:-बाजार से सब्जी लेकर आओ खाना बनाओ…!
मनीष:-ठीक है 100₹ दो…!
राजू:-इतना क्या होगा..!
मनीष:-मोबाइल का बैलेंस खत्म हो गया है 25 का रिचार्ज करवाना है..!
राजू:-ठीक है मेरे पर्स से निकाल लो, करा लेना…!
मनीष:-क्या सब्जी लाऊंगा गोभी मटर ले लूंगा आलू प्याज लहसुन अदरक मिर्चा तो अभी है..!
राजू:-हां ले लेना जो तुम्हारी मर्जी करे…!
अगले दिन 3:00 बज रहे थे शाम को मनीष फोन मिलाता है प्रियंका के पास
मनीष:- हेलो कैसी हो प्रियंका तुम्हारे पैर में चोट लगी थी कैसी है और फोन नहीं किया मैं कितना परेशान था…!
प्रियंका:-रुको यार सब एक ही साथ में बोलोगे ठीक हूँ मोच आई थी मूव लगाया दवा लिया अब बिल्कुल ठीक है तुम कैसे हो और तुम को कौन बताया कि मेरे को चोट लगी है…!
मनीष:;मामा को कल फोन किया था वही बताएं..!
प्रियंका:-उनके पेट मे कोई बात नहीं पचती है,…!
मनीष:-पेपर सब कैसे गए पास तो हो जाओगी ना कि नहीं…!
प्रियंका:-हा पास हो जाओगे पेपर अच्छा बना है….!
मनीष:-क्या कर रही हो सोई तो नहीं थी जगा दिया तुमको…!
प्रियंका:- नहीं यार चाय बना रही हूँ पानी पी रही हूँ आओ चाय पी लो वहां पर तो बहुत दौडाते थे,पानी के लिए मुझे…!
मनीष:-हां यार वहां की बातें सोचते हैं तो यह लगता है कि काश ऐसा ही रहा होता वसंत के सावन में खिल खिलाता हुआ उपवन के पुष्पों के जैसा महसूस होता है यार…!
प्रियंका:- सच में ऐसा होता है तुमको मुझे भी वहां की यादें दिल से तो निकलती ही नहीं और तुम्हारी बाते तुम्हारे साथ जो बातें साथ घूमना यादें सब साथ हो मेरे मन मे,जब बैठी रहती हूं गुमसुम तो तुम्हारी यादें मेरे चेहरे पर मुस्कान भर देती है यह बताओ कब आओगे तुम मेरे घर पर…!
मनीष:- दो दिन बाद आऊंगा बड़े भैया का एग्जाम है चार दिन बाद तो परसों ओ चले जाएंगे तो मैं आऊंगा …!
प्रियंका:; ठीक है चाय भी गिर गई यार छान रही थी..!
मनीष:-मेरे हिस्से की चाय थी इसीलिए गिर गई…!
प्रियंका:-चलो रखती हूँ फोन,चाय दे दू, मनीष उधर से ही फोन कट कर दो…!
मनीष:-मैं पढ़ रहा हूँ..!
प्रियंका :-तुम रखो यार…!
मनीष:- मैं चाहता हूँ तुम ही रखो मुझे फोन काटने का मन नहीं कर रहा है…!
प्रियंका:-रिंकी चाय बाहर दे दो जिसको कम पड़े, आकर बताओ और छान दूंगी..!
रिंकी:-आई दीदी..!
मनीष:-चलो तुम्हें चाय नहीं ले जाना पड़ा अब तो बात करो 5 मिनट और फिर मैं पीयूष के यहां चला जाऊंगा नोट्स लेने..!
प्रियंका:-ठीक है मेरा भी मन नही कर रहा है फोन रखने का,यह बताओ इतना बातें करते हो कि पढ़ाई भी करते हो बुआ-फूफा का पैसा मत डूबा देना..!
मनीष:-यार तुम जैसे दोस्त मिल जाए तो डूबेगा कहां उसकी नैय्या तो पार हो जाएगी…!
प्रियंका:- बातें तो बहुत ही सुंदर बना लेते हो कहा से सीखे हो…!
मनीष:-तुमसे ही तो सीखी है अब रखता हूँ, दो दिन बाद आता हूँ तैयार रहना…!
प्रियंका:-मैं इंतजार करूंगी….!
दो दिन बीत गये तीसरे दिन सुबह 8:00 बजे ही मनीष प्रियंका के पापा को फोन करता है..!
मनीष:- हेलो प्रणाम मामा…!
देवेन्द्र:-खुश रहो कैसे हो कभी आओ मिलकर जाओ…!
मनीष:- ठीक है मामा आ जा रहा हूँ आज कैसे आना है मेरे को बता दीजिए..!
देवेन्द्र:-ठीक है नोट कर लो और स्टेशन पर आ कर कॉल करना, मैं आ जाऊंगा लेने…!
मनीष:-ठीक है मामा..!
देवेन्द्र:- शाम के 3:40 हो गए मुकु का पता नहीं, आने को बोल रहा था मुझको, अभी फोन नहीं किया मैं ही करता हूं हेलो मुकु कहां हो…!
मनीष:-प्रणाम मामा, स्टेशन पर हूँ..!
देवेन्द्र:–ठीक है वहां से बाहर आकर दाहिने साइड बस लगी होगी उसे पकड़कर बोल दो कि बंशी चौराहे पर जाना है मैं चौराहे पर रहूँगा..!
मनीष:-ठीक है मामा मैं आकर फोन करता हूँ,बस वाले भैया जी मुझे बंसी चौराहे पर जाना है मुझे पता नहीं है,आए तो रोक देना,कितना समय लगेगा…!
बस वाला:-30 मिनट लगेगा ₹15 किराया है..!
मनीष:-ठीक है….!
35 मिनट बाद बस बंशी चौराहे पर रूकती है..!
मनीष:- प्रणाम मामा..!
देवेन्द्र:-खुश रहो कुछ खा लो समोसा चाय…!
मनीष:-नहीं मामा जो खाना पीना,चाय पानी करना होगा वही घर पर ही…!
देवेन्द्र:- ठीक है आओ बैठो गाड़ी पर 5 मिनट में घर पर गाड़ी रूकती है मुकु घर में जाओ मैं आता हूँ…!
मनीष:-प्रणाम दादी प्रणाम दादा जी…!
प्रीतम+ प्रेमा:- खुश रहो कौन …!
स्नेहा:- प्रियंका की मौसी ज्योति का भांजा है…!
प्रीतम :- ठीक है..!
मनीष:- पैर छूकर प्रणाम मामी..!
स्नेहा:-खुश रहो आने में कोई दिक्कत तो नहीं हुई..!
मनीष:-नहीं मामी आराम से आ गया….!
स्नेहा:-ठीक है बैठो,प्रियंका रिंकी,मुकु आया है पानी पिलाओ. !
रिंकी:- हां मम्मी आई.. ..!
प्रियंका:-कैसे हो कैसे हम लोगों का ख्याल आया मुस्कुराते हुए बोलती है…!
मनीष:-चेहरे पर हंसी रखते हुए बस मामी और सब की याद आई, तो सोचा चलो आज सभी लोग से मिल लू…!
देवेन्द्र:-बैठो अंदर पंखा चालू करो रिंकी…!
मनीष:-ठीक है मामा..!
प्रियंका:-मुकु ये लो पानी पी लो,,, पापा गैस का पाइप लीकेज हो रहा है बना दो ना.. !
मनीष:- मैं बना देता हूँ उसके बाद पानी पीता हूँ प्रियंका दिखाओ कहां है किचन..!
प्रियंका:- इधर आओ मुकु…!
मनीष:-चाकू दो पाइप काटने के लिए चाहिए…!
प्रियंका:-ये लो चाकू, मानना पड़ेगा,तू वादा बखूबी निभाते हो बहुत मन कर रहा था तुमको देखने को..!
मनीष:-आ तो गया हूँ…!
देख लो जी भर के बहाना है कि मामी मामा से मिलना है मैं भी तो तुमसे ही मिलने आया हूँ, यह लो बन गया रूम में चलता हूँ…!
प्रियंका:-हाथ पकड़ कर रुको 5 मिनट अभी जाना रूम में ,तुमको देख तो लूं…!
मनीष:-ठीक है तुम कहती हो तो रुक जाता हूँ..!
रिंकी:- भैया पानी पी लो..!
मनीष:-ठीक है आता हूँ….!
रिंकी:-मम्मी क्या बनेगा खाना में पापा सब्जी ले आए हैं….!
प्रियंका:-हा सब्जी आया है मम्मी दूध पड़ा है खीर पूरी बना देती हूँ,मुकु को काफी अधिक पसंद है…!
स्नेहा:- ठीक है पूड़ी सब्जी बना दो…!
बातों ही बातों में रात के 9:00बज गए…!
प्रियंका:- चलो मुकु भोजन कर लो..!
रिंकी:-भैय्या टेबल पर खाना लगा देती हूँ कुर्सी पर बैठ कर खा लीजिए..!
मनीष:-ठीक है दादी दादा आए, उनको भी निकालो…!
स्नेहा:-तुम खाओ, सब लोग अभी खाएंगे..!
मनीष:-खाना खाता है सब्जी तो बहुत ही अच्छी बनी हैं
श्याम:- छत पर ही बिस्तर लगा दिया गया है वहीं पर सो जाना कोई दिक्कत तो नहीं..!
मनीष:-ठीक है एक चादर चाहिए…!
रिंकी:-हा सब कर दिया हूँ,मछरदानी भी लगा दिया हूँ…!
मनीष और सभी लोग भोजन कर के सो जाते हैं सुबह उठते है
स्नेहा:-रिंकी मुकु को जगा दो चाय पीले…!
मनीष:-मामी मैं जगा ही हूँ…!
प्रियंका:;चाय पी लो तब जाओ तालाब की ओर…!
मनीष:-पानी चाहिए…!
रिंकी:-ये लो भाई पानी…!
प्रियंका:- जाओ तालाब से जल्दी आना चना की घूघरी भुज रही हूँ…!
मनीष:-ठीक है तीखा मत करना,चाय पीकर चला जाता है और फिर 30 मिनट बाद आता है
मनीष:-रिंकी पानी दो और एक दातुन भी चाहिए.. !
प्रीतम:-और बाबू कैसे हो कोई परेशानी तो नहीं हुई…!
मनीष:-नहीं एकदम अच्छा कोई दिक्कत नहीं हुई,गांव का दृश्य बहुत ही अच्छा लगा,बिल्कुल मेरे गांव की तरह मिल रहा है.. .!
रिंकी:-भैय्या चलो चाय पी लो…!
मनीष:-ठीक है चलो, मामी मैं यहां से कल जाऊंगा, प्रियंका को यह सुनते ही उसके चेहरे पर 12:00 बज गये हो…!
दोपहर को 12:00 बज रहे थे, प्रियंका और मनीष एक कमरे में अकेले बैठे थे..!
प्रियंका :- आये ही क्यों जब चेहरा ही दिखाना था,दो दिन और रुक जाते तो अच्छा रहता…!
मनीष:-रुक जाता यार,लेकिन परसों भैय्या आ जाएंगे इसलिए जाना पड़ेगा..!
प्रियंका:-ठीक है खाना खा लो, तुमको चाची के घर घुमा लाती हूँ, छः दिन और रुक जाते, तो मेरी चाची की लड़की की शादी देख लेते…!
मनीष:- फिर आ जाऊंगा कभी…!
रिंकी:-भाई यही पर भोजन लेकर आती हूँ खा लो..!
मनीष :-ठीक है..!
भोजन हो गया,बातें करते-करते 2:00बज गए,पता ही नहीं चला
प्रियंका:-मुकु चलो चाची के घर घूमा दूँ..!
मनीष:-रुको पांच मिनट चलता हूँ तैयार हो जाऊ..!
प्रियंका:-मैं चलती हूँ,रिंकी मुकु को चाची के घर पर पहुँचा देना…!
रिंकी:- ठीक है तुम जाओ..!
मनीष:-रिकी चलो…!
गायत्री:-रिकी ए कौन है..!
प्रियंका:- चाची यह मेरी मौसी जो समेदा वाली है उन्ही का भांजा हैं…!
मनीष:-प्रणाम मामी, सफाई तो जोरों पर चल रही है घर की…!
गायत्री:- हां बेटा बड़ी वाली लड़की की शादी है 12 तारीख को…!
मनीष:-हां प्रियंका बता रही थी…!
गायत्री:-छः दिन तो बचा है रूक जाओ…!
प्रियंका:-चाची मुकु का दो दिन बाद पेपर है इस लिए नहीं तो रूकता जरूर…!
वहाँ पर भी चावल बीना जा रहा था गीत हो रहा था,दो घंटे निकल जाते हैं पता नहीं चलता है तभी रिंकी आती है…!
रिंकी:-मम्मी बुला रही है चलो भाई…!
मनीष:-चलों चला जाए…!
स्नेहा:-आ गए चाय पी लो रिंकी भैया को चाय दो…!
मनीष:-नीचे रख दो टेबल पर और एक गिलास पानी भी दो..!
स्नेहा:-मुकु रात को क्या खाओगे क्या बनाऊ बोलों…!
मनीष:-जो मर्जी हो बना ओ खा लूंगा, बस तीखा नहीं होना चाहिए..!
स्नेहा:-ठीक है…!
इसी तरह बातें करते-करते रात हो गयी सभी,के साथ
9:00 बज गए रिंकी बुलाती हैं
रिंकी:- भाई चलो खाना खा लो…!
स्नेहा:-आओ मुकु बैठो..!
प्रियंका:-ये लो मुकु खाओ और बताओ कैसा बना है खाना..!
मनीष:- प्रियंका थोड़ा चावल और दो पराठा निकाल दो और नींबू हो तो एक टुकड़ा दे दो…!
प्रियंका:- खा लो तुम हमेशा ऐसा ही करते रहते हो…!
स्नेहा:-निकाले प्रियंका…!
प्रियंका:-प्लेट थमाओ, रिंकी…!
मनीष:-बाबा-दादी को भी बुला दो रिंकी..!
सभी लोग खाना खा लेते हैं मनीष छत पर सोने चला जाता है सोते-सोते सपनों की दुनिया में खो जाता है मनीष प्रियंका नदी के किनारे घूम रहे थे नदियों को देख रहे थे,उसकी लहर थोड़ी ऊँची,नीची बह रही थी….!
प्रियंका:-कितना सुनहरा दृश्य है, अच्छा मौसम लग रहा है नदी में नाव कैसे पार होती होगी,सब लोग कहते हैं जिंदगी और मानव,नदी और नाव के भाती हैं समय के नदी में नाव को कर्म के पतवार से मनुष्य खेकर पार होता है इस संसार में यह बात सत्य है मुकु…!
मनीष:-हां मैं भी तो सुना है’यहां पर खड़ा होकर यही मुझे भी महसूस हो रहा है,यही बात मैं भी तुमसे कहने वाला ही था, चलो ना नाव में बैठते हैं साथ साथ घूमेंगे मजा आएगा…!
प्रियंका:-मुझे डर लगता है…!
मनीष:-मेरा हाथ पकड़ो, डरो मत मैं हूँ…!
स्नेहा:-सुबह हो गई मुकु जाना है कि नहीं उठो,नही तो बस छूट जाएगी…!
मनीष:-जाना है मामी उठता हूँ…!
स्नेहा:- रिंकी चाय नाश्ता लगाओ मुकु को जाना है…!
रिंकी:-हा मम्मी सब तैयार है…!
नाश्ता हो जाता है,मनीष तैयार हो कर अपना बैग लेकर कहता है
मनीष:-मामी 8:00 बज गये है,मेरे को चौराहे तक छुड़वा दो…!
प्रियंका:-मम्मी राहुल से बोल दो आ गया है छोड़ देगा मुकु को चौराहे पर…!
स्नेहा:-राहुल इनको चौराहे पर छोड़कर बस पकड़ा दो लखनऊ वाली…!
मनीष:-प्रणाम मामी, प्रणाम मामा, प्रणाम दादी,प्रणाम दादा जी..चलो भाई…!
सभी लोग:-खुश रहो,जाने के बाद फोन करना भूलना मत…!
मनीष:-ठीक है…!
प्रियंका:- मम्मी दो दिन और रोक लेना चाहिए था मुकु को ,तो अच्छा लगता…!
स्नेहा:-बोला तो था लेकिन जिद कर रहा था उसका पेपर भी आने वाला है बोल रहा था चलो काम कर लो रिंकी मोटर चालू करके,पानी भर दो…!
प्रियंका:-कितना अच्छा फ़ोटो आया है.. मुकु तुम्हारी यह तस्वीर मै अपने पास ही रखूँगी…!तस्वीर देखते-देखते सोचने लगती है,तुम थे तो कितना अच्छा लग रहा था और तुम्हारे जाते ही, जैसे मेरे अंतर्मन में शिथिलता की लहर ज्वार-भाट के भाँति मन मे हिलोरे ले रही है,और आंखों से आंसू बहने लगता है,…!
मनीष:-यह सफर कब बीतेगा,कहते हुए सोचने लगा,प्रियंका तुमसे कुछ ज्यादा बात नहीं हुई नानी यहाँ काफी मजा आया था,मेरा भी फोन खराब हो गया है जब मम्मी फोन भेजेंगी,तब फोन करूंगा…!
सुनीता:-हेलो प्रियंका कैसी हो…!
प्रियंका:;ठीक हूँ.फोन नहीं आया अभी तक एक महीना हो गया….!
सुनीता:-कुछ बात होगी इस लिए नहीं आ रहा हो गा..!
प्रियंका:-फोन आ रहा है लेकर आती हूँ…!
सुनीता:-जाओ,तुम्हारे मुकु का होगा…!
प्रियंका:-हेलो बहुत दिन बाद याद आई,कैसे हो यार याद नहीं आ रही थी क्या …!
मनीष:-नहीं यार ऐसी बात नहीं है, मेरा फोन खराब हो गया मम्मी आज कोलकाता से फोन भेजी है, तभी बात कर रहा हूँ,और तुम को याद ना करू,ऐसा हो नहीं सकता, कल से मेरा इंजीनियरिंग का पेपर है मैं पढ़ लूं फिर कल बात होगी और सब लोग कैसे हैं…!
प्रियंक:-ठीक है सभी लोग,बात मुझसे करने के लिए फोन करते हो और सब की हाल पूछते हो…!
मनीष:-क्या करूं कोटा पूरा करने के लिए पूछना पड़ता है…!
प्रियंका:- ठीक है ये बताओं,तबियत कैसी हैं तुम्हारी…!
मनीष:-ठीक है,..!
पन्द्रह दिन लगातार,बीच-बीच में बातें होती रही,मनीष प्रियंका की,दोस्ती इतनी गहरी हो गयी थी कि,दोनों एक दूसरे के लिए,एक दूजे पर कुर्बान हो जाये…लेकिन खुदा को शायद यह मंजूर न रहा हो सुबह का पहर था…!
देवेन्द्र- रिंकी घर वाला फोन दो बात करनी है, मेरे फोन में बैलेंस नहीं है,…!
प्रियंका:-ओह्ह आज तो मैं गई….!
रिंकी:-लाई पापा,ए लो….!
देवेन्द्र:-दो,ये मुकु का s.m.s.सुबह-सुबह…..!
शायरी:-सूर्य किरण के नवल ज्योति का,जीवन में उद्गार रहे,
हम सब पर अपनों का, थोड़ा-थोड़ा प्यार रहे…!
रिंकी -प्रियंका इतना कौन बात करता है, और इतना सारा sms….!
रिंकी:-दीदी बात करती होंगी मैं नहीं…!
देवेन्द्र:-अब दुबारा बात नहीं करना इतना तुम लोग का मन बढ़ गया हैं,रुको अभी फोन कर के पूछता हूँ.. फोन ही काट दिया…!
मनीष:-हेलो..प्रणाम मामा…!
देवेन्द्र-हेलो खुश रहो,बोलो हो,इतना sms करते हो,क्या बात है,. !
मनीष:-कुछ नहीं मामा उसी तरह… फोन कट जाता है…!
देवेन्द्र:-तुम लोगों अब अपने मन की हो,गयी हो, तुम्हारी मम्मी तुम लोगों का बहुत मन बढा कर रख दिया है…!
स्नेहा:-जाने दो बच्चे है..!
देवेन्द्र:-तुम्हारा ही सब किया धरा हैं,कल नंबर चेंज कर देता हूँ.. !
मनीष:-मामा को भी पता चल गया की मैं और प्रियंका बातें करते है,प्रियंका को बहुत ही डाटा होगा,,.. ए रिश्ता भी अजीब चीज है, मैं अपने घर में छोटा हूँ,और प्रियंका अपने घर में बड़ी है. मम्मी से भी कुछ कहूँ तो भी, कुछ नहीं हो सकता.. !
पीयूष:- कॉलेज चलना है कि नहीं अभी तैयार नहीं हुए…!!
मनीष:-अंदर आ कर बैठों,…!
पीयूष:-यार तुम उदास बैठे हो,…!
मनीष:-नहीं कहा उदास हूँ. मेरा मन नहीं है कॉलेज जाने का तुम चले जाओ…!
पीयूष:-तुम भी चलो आज मजा आएगा…!
मनीष:-जाने को मन तो था लेकिन मेरा मूड खराब हो गया है….!
पीयूष:-क्या बात है,पैसा नहीं है क्या,पार्टी में तुम्हारा पैसा मैं लगा दूँगा,…!
मनीष:-ऐसी बात नहीं है,प्रियंका को sms,किया था सुबह-सुबह उसके पापा का फोन आया था…!
पीयूष:-तो इसमें क्या हुआ,कौन सी बड़ी बात है…!
मनीष:-कोई बात नहीं है लेकिन मैं तो यहां पर इस तरह बैठा हूँ,उसको वहां पर आज डांट सुननी पड़ी होगी..!
मैं जानता तो sms नहीं करता…!
पीयूष:-इतनी सी बात चल फिर कल बात कर लेना मैं तैयार होकर 15 मिनट में आता हूँ…!
इधर प्रियंका के घर पर फोन नंबर बदल गया अपनी गति से समय चक्र चलता रहा लेकिन मनीष और प्रियंका दोनों ,कोई ऐसा दिन नहीं होता जिस दिन दोनों एक दूसरे को याद ना करते हो मनीष तो अपनी मामी को फोन करके प्रियंका के घर और उसकी हाल-चाल बीच-बीच में पूछता रहता था इधर प्रियंका मनीष के फोटो और उसकी पुरानी भेजा हुआ sms पढ़कर उसकी याद करती रहती थी इस तरह आठ महीना बीत गया…!
देवेन्द्र:-स्नेहा,आज प्रियंका का रिश्ता तय करके आया हूँ…!
रिंकी:- पापा दो फोटो देखू,अच्छा तो लग रहा है यह बहुत पतला है..!
प्रियंका:- ला मैं भी देखू..!
रिंकी:- मैं नहीं दूँगी…!
मनीष कुछ दिन बीत जाता है मनीष अपने गांव आता है उसका मन बहुत बेचैन हो रहा था,प्रियंका के पुराने वाले नंबर पर फोन कर रहा था,लेकिन फोन लगता नहीं शाम को 4:00 बज गया था पीपल के पेड़ के नीचे अकेला ही बैठा हुआ था, तभी एका-एक उसका फोन बजता है….!
मनीष:-किसका फोन है जिसको लगा रहा हूँ, उसका लग ही नहीं रहा है दूसरे मिस कॉल कर रहे हैं, देखू किसका है,मिलाता हूँ, हेलो कौन…!
प्रियंका:- इतना जल्दी भूल गया पूछ रहे हो कौन….!
मनीष:- प्रियंका तुम यार मैं अभी-अभी तुम्हारे बारे में ही सोच,रहा था,कब से तुम्हारा नंबर पर फोन लगा रहा हूँ,लेकिन लग नहीं रहा है बंद बता रहा है मैं सोचा पता नहीं किसका नंबर है.. बताओ कैसी हो बहुत दिनों बाद याद आई है मेरी…!
प्रियंका:- मैं तो तुमको रोज याद करती थी, करती हूँ,लेकिन पापा नंबर ही बदल दिए थे ,फिर एक महीने बाद फोन भी खराब हो गया ,दस दिन हुआ दूसरा फोन आया है, तभी तुमसे छिपकर बात कर रही हूँ,छत पर…!
मनीष:-कोई बात नहीं और बताओ कैसी हो उस दिन तो तुमको बहुत सुनना पड़ा होगा,क्या कह रहे थे तुम्हारे पापा……!
प्रियंका:- छोड़ो और बताओ ,तुम्हारी क्या हाल है…!
मनीष:-यार एक बात पूछूं बताओगी क्या…!
प्रियंका:- पूछो ना…!
मनीष:- यह बताओ प्यार में रिश्ता या तो जात-पात क्यों आ जाता है,बीच में, समय की बिडम्बना,क्या चाहती है,क्या इस समाज में,प्यार मानवता है क्या,परिवार छोड़ कर प्यार का हाथ पकड़ कर,मंजिल,की ऊंचाई, संस्कार की पगड़ी को बांध कर,जी सकता है इंसान ,या,प्यार को,परिवार और रिश्ते पर प्यार का बलिदान करके अपने फर्ज को कर्तव्य को उच्च शिखर पर पहुंचा कर अपने कर्तव्य का निर्वाहन उचित रूप में करना उचित है…!
प्रियंका:-तुम्हारी बातों में तो वाकई सच्चाई है पर यह सब बातें वही कर पाते हैं जो एक दूसरे को सच्चा प्यार करते हैं..!
शायरी—
ओलों की बूंदे पौधों पर टिक जाती है
सच्ची मोहब्बत रिश्तो में रुक जाती है
तेरी यादें चेहरे पर ठिठक जाती हैं
तेरा हर एहसास मेरे जहन में ढुक जाती है
मनीष:-शायरी तो काफी अच्छी कर लेती हो और,यही सस्त्विक सत्य भी लगता है…!
प्रियंका:- एक सहेली भेजी थी,जो याद हो गई…!
मनीष:-मैं तुमसे मिलने तुम्हारे गांव आ रहा हूँ..!
प्रियंका:-तुम नहीं आओ,प्लीज मेरी कसम खा कर कहो…!
मनीष:-क्यों क्या बात है…!
प्रियंका:-समझा करो मैं तुमको जरूर बुलाऊंगी,समय आने पर पक्का वादा करती हूँ….!
मनीष:-ठीक है तुम्हारी मर्जी…!
रवि:-मुकु तुम्हारी मम्मी बुला रही हैं जल्दी चलो कुछ काम है…!
मनीष:-प्रियंका मैं फोन रखता हूँ, आज काफी बात हुई पर,फोन रखने का मन नहीं कर रहा है…!
स्नेहा:-प्रियंका कहा हो,यहां काम है आओ…!
प्रियंका:- मम्मी बुला रही हैं रखती हूँ…!
फिर बात होगी इसी तरह दो से चार दिन में एक बार फोन पर प्रियंका और मनीष की बात होती रहती थी करीब इसी तरह ढाई साल बीत गया, मनीष जॉब करने लगा और अपना परिवार देखने लगा,प्रियंका भी उसके बारे में सोचती और बातें करती,दोनों इतना नजदीक आ गए थे कि दोस्ती से प्यार में कब रिश्ता तब्दील हुआ कुछ पता नहीं चला,लेकिन एक दूसरे को बोलना चाहते थे पर बोल ना सके फिर भी उनके पास प्यार और मित्रता का अटूट बंधन था, जैसे पानी और मछली एक दूसरे से अलग हो जाती है,अपना जीवन त्याग देती है,उसी तरह प्रियंका और मनीष एक दूजे को चाहते थे,इधर प्रियंका की शादी तय हो गयी,पहला वाला रिश्ता टूट गया था,लेकिन इस बार पक्का हो गया समय भी निश्चित हो गया…!
रिंकी:-मुकु भाई से बतायी की नहीं,…!
प्रियंका:-फोन ला बता देती हूँ,देखना कोई आये नहीं…!
रिंकी:-ठीक है,ये फोन लो बातें करों मैं देखती हूँ…!
मनीष:- जॉब पर रहता हूँ तभी सबका फोन आता है,ओह्ह प्रियंका,कट कर करता हूँ….!
प्रियंका:-हेलो कैसे हो..!
मनीष:-हेलो प्रियंका कैसी हो…!
प्रियंका:-ठीक हूँ, कैसे हो कहा हो…!
मनीष:-आफिस में बैठा हूँ,दो महीना बाद याद आयी,यार तुम्हारी आवाज को क्या हुआ तबीयत तो ठीक है ना क्या बात है बताओ…!
प्रियंका:-एक हफ्ता से तबीयत खराब है…!
मनीष:-इतना दिन से तबीयत खराब है और तुमने बताया भी नहीं,मेरा मन काफी दिनों से बेचैन था और तुम्हारा फोन लग ही नहीं रहा था…!
प्रियंका:-उसी तरह यह बताओ तुम कैसे हो खाना तो खाया कि नहीं…!
मनीष:- खा लिया हूँ ,तुम भी खा लो,खाया नहीं,तो जाओ,जल्दी भोजन करो..!
प्रियंका:-मन नहीं कर रहा है खा लूंगी,तुमको अप्रैल में आना पड़ेगा,शादी में तुमको आना पड़ेगा चाहे कुछ भी हो,…!
मनीष:- सुनते ही,मुंह खुला का खुला रह जाता है और आंखें भर जाती हैं,अच्छी बात है बधाई हो…!
प्रियंका:-तुम आओगे ना तुमको आना है वादा करो कि आओगे…!
मनीष:-हां ठीक है आऊंगा वादा है, मेरा मर जाऊंगा लेकिन वादा जरूर निभाऊंगा साहब का फोन आ रहा है..!
प्रियंका:- ठीक है…बात कर लो फिर कॉल करना इसी नंबर पर रखती हूँ,..!
रिंकी:-दीदी फोन रखो मम्मी…!
मनीष:-ओह्ह,क्या,सोचा था क्या हो गया है,हे प्रभु हम दोनों से आप क्या करवाना चाहते हो, मेरा मार्ग-दर्शन करो प्रभु प्रियंका की तबीयत ठीक नहीं है उसकी तबीयत ठीक हो जाए,खुदा मेरी दुआएं कबूल करो, हाथ जोड़कर प्रेम भाव से कहता हूँ, चाहे मेरी तबीयत खराब हो लेकिन उसे ठीक कर दो प्लीज भगवान आपसे प्रार्थना करता हूँ, आपको पैर छूकर प्रणाम करता हूँ, मेरी विनती स्वीकार करो….!
कहते हुए उसकी आंखों से आंसू बहने लगे, जैसे पहाड़ों से झरना फूट-फूट कर रो रहा हो,यही दृश्य उस समय मनीष के चेहरे पर शांत भाव उदासी का था,जो कि करुण रस की ओर अग्रसर रहा था,सुबह हो गई प्रियंका के तबीयत में सुधार होने लगा और मनीष इधर अपने प्यार के बारे में सोच-सोच अकेले में बैठ कर आंसू बहा रहा था, इसी तरह पाँच,दिन बीत जाता है, छठवां दिन मनीष ऑफिस में काम कर रहा था तभी फोन आता है मनीष काटकर करता है…!
मनीष:-हेलो कैसी हो प्रियंका तबीयत कैसी है तुम्हारी…!
प्रियंका:-ठीक हूँ, खाना खा रही हूँ,तुम क्या कर रहे हो..!
मनीष:-ऑफिस में बैठा हूँ ,यार भीरी की बातें यादें तुम्हारी भूले, नहीं भूला पा रहा हूँ, क्या दिन थे उस समय जब-जब सोचता हूँ,एक अलग ही हदय में तरंग स्पंदित हो जाती है…!
प्रियंका:-मेरा भी मुकु,क्या करूं यह रिश्ता परिवार मां बाप के संस्कार जो हम सबको मिला है उसी की अवहेलना करके तो गलत कदम नहीं उठा सकते ना…!
मनीष:-प्रियंका ठीक कहती हो तुम,अगर केवल एक ही व्यक्ति,एक ही परिवार की,मान सम्मान, इज्जत का सवाल होता तो अनुचित भी,उचित कदम होता…!
प्रियंका:-ठीक कह रहे हो…!
मनीष:- जानने को तो मेरा पूरा परिवार जानता है लेकिन अभी बड़े भाई जी की शादी और घर की लोक लाज, परिवार से बढ़कर, रिश्तेदारों,अपनों की इज्जत….!
प्रियंका:-हा यार सत्य..!
मनीष:- अपने वजह से किसी की इज्जत से खेलने का हक नहीं है किसी भी प्यार करने वाले को..!
प्रियंका:-तुम सही कह रहे हो,लेकिन ए रिश्ता और समाज को प्रेम मोहब्बत के बंधन में बांध कर मुजरिम,हीन व्यक्ति के व्यवहार सा क्यों देखता और प्यार करने वाले को समझा जाता है…!
मनीष:-क्या करें हम लोगों के बस में कुछ होता तो करें भगवान को भी शायद यही मंजूर हो…!
प्रियंका:-लेकिन मैं इस सब को नहीं मानती…!
मनीष:-नहीं प्रियंका तुम सही कह रही हो,लेकिन इस समाज में परिवार और रिश्तेदारों के साथ चलना,रहना,उनका मान सम्मान,उनकी, जग हंसाई का कारण,अपने ख़ानदान, पुरखो की शान,पर आंच आती है,परिवार का व्यक्ति जो है,उसको हर जगह समाज में, लजा से सर नीचा करना पड़ेगा..!
प्रियंका:-हा बात तो सही कह रहे हो…!
मनीष:-यह बताओ, राधा-कृष्ण का प्यार सच्चा था, वह नहीं मिले ,लेकिन उनको याद तो सब करते हैं उनके प्रेम की पूजा करते हैं,उन्होंने प्यार का बलिदान दिया…!
प्रियंका:-ओ भगवान थे तो उनके प्यार की चर्चा हुई अपने कौन भगवान हैं..!
मनीष:-प्रियंका तुम सही कह रही हो यार ,प्यार कभी मरता नहीं है,वह सदैव ह्रदय में निवास करता है और प्यार हमेशा बलि-दान माँगता है, बलिदान भी वही लोग देते हैं, जो सच्ची मोहब्बत करते हैं..मनीष यह सब बातें सीने पर पत्थर रखकर बोल रहा था…!
प्रियंका:-शायद आज के बाद हम और तुम फिर बात ना कर सके…!
मनीष:-ऐसा मत कहो,हमेशा तुमसे बात होगी…!
प्रियंका:-हमारे-तुम्हारे त्याग से प्यार की हार तो नहीं यार…!
मनीष:-ये गर्व की बात होगी,कि दो प्रेमी-प्रेमिका अपने परिवार, रिश्तो, की मर्यादा की रक्षा करते हुए अपने प्यार को बलिदान कर दिया…!
प्रियंका:- यह बात तो केवल हम और तुम जानते हैं…!
मनीष:- ऐसी बात नहीं है, भगवान ,यह अंबर ,पवन अग्नि ,इसके साक्षी है,और जीवन भर रहेंगे…!
प्रियंका:- तुमने तो इतनी अच्छी बात करके मेरी,अंतर मन की आंखें खोल दी, मेरे हृदय को शांति मिली,तुमसे बातें कर लेता हूँ ,तो मन का बोझ हल्का हो जाता है…!
मनीष:- प्रियंका, यही सत्य ,धर्म और कर्तव्य है जिसका हम और तुम पालन किया,जो इसका पालन करता है वह हमेशा जीवन भर प्रेम-गाथाओं में अमर हो जाता है…!
प्रियंका:-सत्य कह रहे हो मनीष….!
शायरी—-
इस बलिदान को हमेशा याद रखेंगे
जिंदगी में महफील का हिसाब रखेंगे
तुम्हारे इस तजुर्बे पर,किताब लिखेंगे
शायर तो बनेंगे हम उस दिन
जिस-दिन आप हर शायरी का जवाब लिखेंगे…!
इस तरह चार माह बीत जाता है मनीष प्रियंका की शादी में जाकर अपना वादा पूरा करता है इस तरह दोनों अपने प्यार का बलिदान कर देते हैं,रिश्तों के सप्रेम, संबंध में और दोनों एक दूसरे को हमेशा याद करते हैं और अपने नई जिंदगी का शुरुआत अपने प्यार के बलिदान के साथ करते हैं…?
धन्यवाद
राइटर:-इंजी० नवनीत पाण्डेय सेवटा(चंकी)

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ER.NAVANEET PANDEY
ER.NAVANEET PANDEY
Azamgarh
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नाम:- इंजी०नवनीत पाण्डेय (चंकी) पिता :- श्री रमेश पाण्डेय, माता जी:- श्रीमती हेमलता पाण्डेय शिक्षा:-...
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