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प्यार का जाम तू पिला के देख

प्यार का ज़ाम तू पिला के देख

अपने सीने से मुझे लगा के देख

मैं तेरे ख्वाबों में आ जाऊंगा

मुझे एक बार तू बुला के देख

शमा बनकर भी मैं जल जाऊँगा

प्रेम की आग से जला के देख

क़ायम हूँ ज़िद पर मैं अब भी अपनी

मेरे कदमों को तू डिगा के देख

प्रेम का सिक्का महंगा होता है

इसकी कीमत ज़रा लगा के देख

मैं तेरे दिल में समा जाऊँगा

अपनी आँखों में तो बसा के देख

जख़्मी हो जाएगा मेरा दिल भी

हुस्न का तीर तू चला के देख

सूना संसार तेरे बिन ये है

खुद को तू नींद से जगा के देख

कब से बैठा हूँ तेरी राहों में

ज़रा अपनी गली में आ के देख

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Author
नाम-अंजनी कुमार शर्मा पिता- श्री राम प्रकाश शर्मा माता- श्रीमती लीलावती शर्मा शिक्षा- परास्नातक {हिंदी साहित्य, राजनीति विज्ञान}, नेट/जेआरएफ {हिंदी}, बीएड {अध्ययनरत} पता- रायबरेली, उत्तर प्रदेश प्रकाशित रचनाएँ- श्री नर्मदा…
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