प्यारी सी बेटियाँ

इस दुनियामें ऐसा कोई काम नहीं है

जो बेटियों ने करके नां दिखाया है ,

छोटी सी वो गुड़िया बनकर रहती हे

पापा मम्मी की जान बनकर रहती हे ,

सुनती आई हे सदियों से ये बातें सबकी

ये करो ये ना करो की, सख्तियॉ सहती हे,

रहे कितने ही अवरोध को तोड़ती हुई

बनकर गंगा की धार सी निकली है,

अपने घरको अपना बनाकर पूरा कहा जिया

की दूसरा घर संवारने बिछड़ती हे बेटियांँ,

लाख दुःख यहाँ सहकर भी उफ़ ना करे

नये जीव को जन्म देकर हँसती हे बेटियांँ .

-मनिषा जोबन देसाई

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Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "बेटियाँ"

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