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प्यारी बेटी जान्हवी —

प्यारी बेटी जान्हवी —- दोहे चार
व्यक्त मौन से जान्हवी , तुम क्यों हो अंजान ।
नयन उनींदे अधखुले , नहीं सकें पहचान । ।
सोई पलकों में किसे , बैठी अपना मान ।
सपनों में पाकर किसे , खोया तेरा ध्यान । ।
सौंदर्य नूतन धवल , यौवन की मझधार ।
बेटी उपवन में सहज , भ्रमर करें गुंजार । ।
काजल जीवन दीप दे , उजियाले का ध्यान ।
रहें प्रकाशित घर सदा , बढ़े सदा सम्मान । ।
डा प्रवीण श्रीवास्तव 28-01-2018

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CMS combined distt hospital Balrampur.born1july1961 .intersts in litrature.science.social works&pathologyµbiology. Books: कथा अंजलि -कथा संग्रह लेख अंजलि- लेख संग्रह प्रेमांजली -कहानी संग्रह
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