प्यारी बिटिया

मुझे पता है, एक दिन बेटी,
छोड़ हमें तुम जाएगी ।
मेरे घर-आँगन को तेरी,
याद बहुत ही आएगी ।

तू तो है इस घर की रौनक,
तुलसी की खुशबू है तू ।
नहीं पता है, तुझको बिटिया,
ममता की मूरत है तू ।

अपने घर में जाकर बेटी,
घर को स्वर्ग बनाना तुम ।
हँसी-खुशी से जीवन जीना,
सब पर स्नेह लुटाना तुम ।

मानव-मूल्यों के खातिर तुम,
हर संकट से लड़ते रहना।
आँखों से न अश्रु छलके,
इसका ध्यान हमेशा रखना ।

रहे विनम्रता साथ तुम्हारे,
न्याय से नाता जोड़े रखना।
कटु वचन ना मुख से निकले,
ध्यान हमेशा इसका रखना ।

मन जब भी घबराए तेरा,
याद मुझे बेखटके करना ।
गलत कभी ना करना बेटी,
गलत किसी का कभी न सहना ।

तू तो है इस जग की माता,
इसका ध्यान हमेशा रखना ।
तेरे बल पर यह धरती है,
यह गौरव तुम मन में रखना ।
— डाॅक्टर यू. एस. आनंद ।

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Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "बेटियाँ"

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