Jan 7, 2017 · दोहे
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प्यारा अपना गाँव (दोहे)

खेत मेढ कच्ची सड़क,पीपल की वो छाँव ! 
खोकर खुद ही खोजता,प्यारा अपना गाँव !!

दिनभर खेले धूप में,….. दौड़े नंगे पाँव ! 
उस बचपन की याद है, प्यारा अपना गाँव !!
रमेश शर्मा.

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RAMESH SHARMA
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दोहे की दो पंक्तियाँ, करती प्रखर प्रहार ! फीकी जिसके सामने, तलवारों की धार! !... View full profile
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