कविता · Reading time: 1 minute

पैसा

पैसे से अपने भी दूर हो जाते हैं,
पैसे का ये कैसा खेल देखो।
कभी हुए थे जो दुश्मन ,
उनका फिर तुम मेल भी देखो।
सबसे अहम् हैं माना जाता ,
पैसा ही अब सबका दाता।
चमक में इसकी पड गया,
हर रिश्ता अब फीका।
बड़ा मूल्यवान होता हैं,
पैसे का रूप सरीखा।
यही धारणा हो गयी मन में,
ख़ुशी मिलेगी बस इस धन में।
पैसे ने शिक्षा को भी तोल दिया,
कॉलेज में घूस को पहला रोल दिया।
ये दुनिया अब पैसो से ही चलती हैं,
बिन पैसा हर चीज अधूरी लगती हैं।
शिक्षा में चाहिए पैसा,
पूजा में चाहिए पैसा।
बस पैसा ,पैसा ,पैसा
हर चीज में चाहिए पैसा……..

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