Aug 30, 2017 · गीत
Reading time: 2 minutes

पैरोडी

बाबा राम रहीम के उद्गार
(फिल्मी तर्ज पर एक गीत)

जज ने जरा रहम नहीं खाया है दोस्तो
बाबा तुम्हारा जेल में आया है दोस्तो
उम्मीद न थी रेप का आरोप धर दिया
दो युवतियों ने ये गजब का काम कर दिया
जो बात असंभव थी वही बात हो गई
सूरज चमकता रह गया पर रात हो गई
मछली ने मगरमच्छ को खाया है दोस्तो
बाबा तुम्हारा जेल में आया है दोस्तो

लाखों रहे श्रद्धालु भक्ति भाव में सने
संकट की घड़ी आई तो सड़कों पै जा तने
भक्तों ने मेरे वास्ते क्या-क्या नहीं किया
सिरसा से लेके दिल्ली को भी थरथरा दिया
कितनी बसों को जाके जलाया है दोस्तों
बाबा तुम्हारा जेल में आया है दोस्तों

कानून ने सच्चा डेरा झूठा बना दिया
चरने को मुझे जेल में खूँटा बना दिया
आंखों में कैसी कैसी सूरतें हैं तैरतीं
उनको गले लगाया जो बिल्कुल भी गैर थीं
मनचाहा रास रोज रचाया है दोस्तो
बाबा तुम्हारा जेल में आया है दोस्तो

मैं रोया गिड़ गिड़ाया वा गुहार लगाई
रुतबा बड़ा वा ज्ञान शान काम ना आई
भक्तों की सेना रोक रोक दूर भगाई
बेदर्दी बीस वर्ष की सजा थी सुनाई
मैं बच ना सका ऐसा फंसाया है दोस्तो
बाबा तुम्हारा जेल में आया है दोस्तो

मैं बन गया उद्यान से सूखी हुई डाली
राजा का ठाठ छिन गया बनना पड़ा माली
काटी है पूरी रात जाग-जाग के मैंने
देखे हैं दर्द सामने हर दाग के मैंने
क्षणक्षण हिसाब पूरा लगाया है दोस्तो
बाबा तुम्हारा जेल में आया है दोस्तो

गुरु सक्सेना नरसिंहपुर मध्य प्रदेश

1 Like · 2 Comments · 43 Views
guru saxena
guru saxena
104 Posts · 8.5k Views
Follow 3 Followers
You may also like: