पैदल चल दिए

भूख -प्यास से तङप रहे सब ।
इस कोरोना की महामारी मे ।
खासकर उनको जो कमाने गए थे शहरो मे ।
यातायात के साधन सब बंद है इस आफत की अंगङाई मे ।
शासन -प्रशासन ये सब कर रहा जनता के भलाई मे ।
रोज जो कमाने खाने वाले मर रहे मंहगाई मे ।
घर को जाने को आतुर है,सब हमको कोई तो पहुंचाओ ।
आज यादआ रही मां की हाथो की वो रोटी जिसको मै खाता था ।
पत्नी पुत्र लिए है बेबस इस तन्हाई मे ।
मां भी तङप कर गांव वाले को यह हाल बताती है ।
कि शहर मे भूखे और बेघर मेरे पुत्र, पतोहू और नाती है।
मकान मालिक ने किराया न देने पर निकाला है ।
कोई तो जाओ लेकर आओ ।
गांव वाले सुन ये अपनी बेबसी बताए है ।
चलने के लिए लोग है मजबूर ।
पैदल ही अपने घरो को ।
है ये स्थित करो या मरो की ।
भूख की तङप से आंखो का अश्क निकल जाता है ।
कोरोना का कहर आज पूरे विश्व पर भारी पङा है ।
सभी सुरक्षा बरते घरो से न निकले कोई उठाए यही बीङा है ।
90 किमी सफर तय कर आज पैदल ही मेरे गांव से आया एक व्यक्ति ।
पैर पूरा सूजा हुआ है,उसका कैसी ये आई है विपत्ति ।
नवरात्र महीना चल ये रहा दिखाओ न कोई मां शक्ति ।

Rj Anand Prajapati

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