Aug 22, 2016 · कविता
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पेटभरना जरूरी है

कूडा बीनते दो मासूम बच्चों को देख मन करुणा से भर गया
कदम एक पल के ठिठक गया
सोचने लगी कि हम अपने बच्चो को कितनी सुविधाएं देते है
और एक ये है जो कचरे में अपना जीवन टटोलते है
जिन हाथों मे स्कूल बैग होना चाहिए
उन हाथो मे कचरे का झोला ??
कितना अशोभनीय है
गरीबी या अशिक्छा ??
सोच मे पडते हुए पूछा
स्कूल जाओगे ?
अजीब सी वित्रष्णा ऑखों मे भरकर बोला
जिंदगी की जद्दोजहद में पेट भरना जरूरी है
जीने के लिए क्या स्कूल जाना जरूरी है ?
सच ही तो है जीने के लिए पेट भरना जरूरी है ….

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NIRA Rani
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साधारण सी ग्रहणी हूं ..इलाहाबाद युनिवर्सिटी से अंग्रेजी मे स्नातक हूं .बस भावनाओ मे भीगे... View full profile
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