पृथ्वी है तो हम हैं (पृथ्वी दिवस पर विशेष)

दिनांक 22/4/19
लेख – पृथ्वी है तो हम है

आज विश्व में यह विषय गंभीर चिंतन और चर्चा का है कि पृथ्वी को कैसे बचाया जाए ।
अगर हम गहराई में जाए तो पाएंगे कि :
” इस विषय पर बाते ज्यादा हो रही है , जबकि हकीकत में काम कम हो रहे है ।”
वृक्षों की अंधाधुंध कटाई
वृक्षारोपण के प्रति उदासीनता
पेट्रोल डीजल का बढता उपयोग
नदी तालाब झीलों का सूचना , उनका रखरखाव नहीं होना , सीवेज का पानी उसमें छोड़ना
गांवो का सिमटना , शहरीकरण ,
कांक्रीट का बढता जाल ,
एसी का बढता उपयोग ,
बढता प्रदूषण
जैसी बातें ऐसी हैं जिससे पृथ्वी का तापमान बढता जा रहा है , जो भविष्य में घातक सिध्द होगा अंर हो रहा है ।
अगर हमें सही मायने में पृथ्वी बचाना है तो जमीनी स्तर पर काम करना होगा ।
यह याद रखें
” पृथ्वी है तो हम हैं
जल है तो जीवन है ।”

स्वलिखित
लेखक संतोष श्रीवास्तव भोपाल

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